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कचरे से करोड़ों की कमाई: इस धांसू फॉर्मूले ने देश को सिखाया कबाड़ को ‘सोना’ बनाना

कचरा आज के समय में हर शहर की सबसे बड़ी सिरदर्दी है, लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर ने इसे कमाई का जरिया बना लिया है. बायो CNG, जैविक खाद और PPP मॉडल के दम पर इंदौर नगर निगम सालाना 4 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू जनरेट कर रहा है.

Indore, Madhya Pradesh

Money from Waste: आज के समय में देश का कोई भी छोटा-बड़ा शहर हो, कचरा हर जगह सबसे बड़ी सिरदर्दी बन चुका है. कई शहरों के बाहर तो कचरों के इतने ऊंचे पहाड़ खड़े हो गए हैं कि उन्हें देखकर ही डर लगने लगता है. सरकारें और प्रशासन अभियान तो खूब चलाते हैं, लेकिन जमीन पर बात बन नहीं पाती. पर क्या आप जानते हैं कि जिसे हम फालतू समझकर फेंक देते हैं, उसी कचरे से हर साल करोड़ों रुपये की कमाई की जा सकती है? जी हां, मध्य प्रदेश के इंदौर शहर ने इस नामुमकिन से दिखने वाले काम को सच कर दिखाया है और आज वह कचरे से कमाई का सबसे बड़ा रोल मॉडल बन चुका है.

कैसे होती है कचरे से करोड़ों की कमाई?

इंदौर नगर निगम ने कचरे को आपदा नहीं, बल्कि मुनाफे का जरिया बना लिया है. आज निगम इसी कचरे को प्रोसेस करके हर साल 4 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर रहा है. इसके लिए निगम शहर के गीले कचरे से बड़े पैमाने पर जैविक खाद तैयार करता है जिसकी किसानों में इतनी भारी डिमांड है कि इसे पूरा करना भी मुश्किल हो रहा है.

इसके अलावा चोइथराम मंडी से निकलने वाले जैविक कचरे से बायो CNG गैस बनाई जाती है जिससे निगम को सालाना करीब 1 करोड़ रुपये की सीधी आमदनी होती है. इस मॉडल को बढ़ाने के लिए निगम अब PPP मोड पर काम कर रहा है जहां एक प्राइवेट कंपनी को सिर्फ जमीन दी गई है और कंपनी कचरा प्रोसेस करने के बदले निगम को हर साल 45 लाख रुपये देती है. इस तरह सूखे और गीले कचरे के स्मार्ट मैनेजमेंट से इंदौर हर साल करोड़ों का रेवेन्यू जनरेट कर रहा है.

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ये कमाल आखिर किया किसने?

अब सवाल उठता है कि इंदौर हमेशा स्वच्छता में नंबर वन क्यों रहता है और यह मुकाम किसने दिलाया? इसका सबसे सीधा जवाब है वहां के आम नागरिक और सफाई कर्मचारी. इंदौर कभी बाकी आम शहरों जैसा ही था जहां गंदगी आम बात थी. लेकिन वहां के नगर निगम ने एक सख्त और स्मार्ट सफाई नीति बनाई. सबसे पहले लोगों को जागरूक किया गया कि वे घरों में ही गीला और सूखा कचरा अलग-अलग डस्टबिन में रखें. इंदौर की जनता ने इस मुहिम को सरकारी आदेश नहीं बल्कि दिल और दिमाग से अपना लिया. स्थानीय लोगों के इसी 100% सहयोग और सफाई कर्मियों की दिन-रात की मेहनत की वजह से ही इंदौर आज देश का सबसे साफ शहर बना हुआ है.

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-भारत एक्सप्रेस



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