Maruti Suzuki Consumer Court Case
Maruti Suzuki Consumer Court Case: रायपुर कंज्यूमर कोर्ट ने एक अहम फैसले में वाहन निर्माता Maruti Suzuki को ग्राहक के पक्ष में बड़ा निर्देश दिया है. कोर्ट ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता की खराब कार वापस लेकर 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की नई E20 फ्यूल पावर्ड कार उपलब्ध कराए. यदि कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो उसे कार की पूरी कीमत के साथ अन्य खर्च और मुआवजा भी देना होगा.
क्या है पूरा मामला?
रायपुर निवासी डॉक्टर प्रेमराज देब्ता ने जून 2024 में Maruti Suzuki Grand Vitara Strong Hybrid Zeta Plus SUV खरीदी थी. कुछ समय बाद एक शाम उनकी कार अचानक बीच रास्ते में बंद हो गई. इसके बाद वाहन को कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर ले जाया गया. सर्विस सेंटर ने जांच के बाद बताया कि पेट्रोल में मिलावट होने की वजह से कार में यह समस्या आई है। हालांकि ग्राहक ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया और इसे वाहन की तकनीकी खामी बताया.
ग्राहक ने क्या लगाया आरोप?
डॉ. प्रेमराज देब्ता का आरोप है कि कार खरीदते समय कंपनी या डीलर की ओर से उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि वाहन का इंजन E20 पेट्रोल के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं है. उनका कहना था कि यदि यह जानकारी पहले दी जाती, तो वे खरीदारी का फैसला अलग तरीके से लेते. इसी आधार पर उन्होंने कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई.
कोर्ट ने क्या दिया आदेश?
कंज्यूमर कोर्ट ने Maruti Suzuki को 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की खराब कार वापस लेकर उसी मॉडल की नई E20 फ्यूल पावर्ड कार देने का निर्देश दिया है. यदि कंपनी ऐसा करने में विफल रहती है, तो उसे ग्राहक को 20,50,494 रुपये लौटाने होंगे। इसमें वाहन की कीमत 18.29 लाख रुपये, आरटीओ शुल्क 1,86,850 रुपये और बीमा प्रीमियम 34,644 रुपये शामिल हैं.
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मानसिक पीड़ा के लिए भी मिलेगा मुआवजा
कोर्ट ने आर्थिक राशि लौटाने के अलावा ग्राहक को मानसिक क्षति के लिए 1 लाख रुपये और वाद-व्यय के लिए 10 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया है. यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे यह संदेश भी जाता है कि वाहन खरीदते समय ग्राहकों को उत्पाद की तकनीकी जानकारी और उसकी सीमाओं के बारे में पूरी और स्पष्ट जानकारी देना कंपनियों की जिम्मेदारी है.
भारत एक्सप्रेस
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