Sonam Wangchuk Wife: 20 दिनों की भूख हड़ताल के बाद पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने से पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया. वांगचुक के अस्पताल जाने के बाद अब इस आंदोलन की कमान उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने संभाल ली है. गीतांजलि ने दोटूक लफ्जों में ऐलान कर दिया है कि अगर 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च में सोनम वांगचुक शामिल नहीं हो पाते हैं, तो वह खुद इस मार्च का नेतृत्व करेंगी.
कौन है गीतांजलि और क्या है उनका आरोप?
गीतांजलि आंग्मो सोनम वांगचुक की पत्नी हैं और वे एक बेहद पढ़ी-लिखी और स्थापित शख्सियत हैं. मूल रूप से ओडिशा के बालासोर के एक पंजाबी परिवार में जन्मीं गीतांजलि ने फिजिक्स से ग्रेजुएशन और जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (XIMB) से MBA किया है. इसके बाद उन्होंने करीब 15 साल तक डेनमार्क समेत कई देशों में कॉरपोरेट सेक्टर में शानदार काम किया.
लेकिन देश और समाज के लिए कुछ करने की चाह उन्हें भारत वापस ले आई. वे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठित चेवनिंग स्कॉलर रह चुकी हैं और भारत सरकार की तरफ से ‘वीमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवॉर्ड’ से भी सम्मानित हैं. इसके अलावा वे कराटे में ब्लैक बेल्ट हैं और ओडिसी व रूसी बैले नृत्य में भी माहिर हैं.
यूं हुई वांगचुक से मुलाकात
गीतांजलि और सोनम वांगचुक की मुलाकात एक एजुकेशन कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई थी. शिक्षा और समाज में बदलाव को लेकर दोनों के विचार इतने मिले कि यह रिश्ता शादी के बंधन में बदल गया. साल 2017 में दोनों ने मिलकर लद्दाख में ‘हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स’ (HIAL) की स्थापना की, जो लद्दाख में टिकाऊ विकास और सोलर-हीटेड टेंट जैसी तकनीकों पर काम करता है.
हर कानूनी लड़ाई में बनीं वांगचुक की ढाल
यह पहली बार नहीं है जब गीतांजलि आंदोलन के फ्रंट फुट पर आई हैं. पिछले साल जब वांगचुक को हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेजा गया था, तब गीतांजलि ने ही सुप्रीम कोर्ट से लेकर राष्ट्रपति तक का दरवाजा खटखटाया था और 170 दिनों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें रिहा कराया था. अब जब 20 जुलाई को संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन मार्च होना है, तो गीतांजलि इस आंदोलन का सबसे मजबूत और नया चेहरा बनकर उभर रही हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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