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शिंदे गुट में शामिल 6 सांसदों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन, लोकसभा सचिवालय को भी नोटिस

शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा सचिवालय और सभी छह सांसदों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है

Edited by Sahil Singh

शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मामले में अदालत ने लोकसभा सचिवालय और पार्टी बदलने वाले सभी छह सांसदों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

SC ने सांसदों से मांगा जवाब

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच ने शिवसेना (यूबीटी) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. पार्टी का आरोप है कि लोकसभा स्पीकर ने नियमों के खिलाफ जाकर उसके सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मंजूरी दी है.

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील ने अदालत में कहा कि स्पीकर का फैसला संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है. उनका कहना था कि शनिवार देर रात विलय को मंजूरी देने से पार्टी को अपनी संसदीय रणनीति बनाने का मौका भी नहीं मिला और संसद में उसकी स्थिति प्रभावित हुई.

यह सांसद हुए शामिल

दरअसल, 18 जुलाई को लोकसभा स्पीकर ने शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मान्यता दी थी. इसके बाद लोकसभा में शिंदे गुट की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई, जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों की संख्या घटकर केवल तीन रह गई.

जिन सांसदों के विलय को मंजूरी मिली है, उनमें संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व), नागेश पाटिल-अष्टीकर (हिंगोली), ओमप्रकाश राजेनिंबालकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी) शामिल हैं.


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यह याचिका वकील निशांत पाटिल के माध्यम से दायर की गई है. इसमें 18 जुलाई को जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके जरिए इन सांसदों के विलय को मान्यता दी गई थी.

इससे पहले हुई सुनवाई में वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि हाल के समय में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जहां सांसद जिस पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़कर जीतते हैं, बाद में उसी दल में शामिल हो जाते हैं. उनका कहना था कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और दल-बदल कानून से जुड़े गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े करता है. अब सभी पक्षों के जवाब मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई करेगा.

-भारत एक्सप्रेस



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