कभी भारत का ही हिस्सा रहे बांग्लादेश में इन दिनों एक बीमारी से कोहराम मच गया है. वहां खसरे (Measles) का प्रकोप बेकाबू हो गया है. जिसके कारण 24 घंटों में चार और मासूम बच्चों ने दम तोड़ दिया. खसरे से हुई मौतों का आंकड़ा 820 तक पहुंच गया है.
बांग्लादेशी स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के अनुसार, अब तक लैब में पुष्टि किए गए संक्रमितों की संख्या 15,442 तक पहुंच चुकी है, जबकि कुल संदिग्ध मामले 1,23,753 दर्ज किए गए हैं. अस्पतालों में रोजाना औसतन 800 से अधिक नए मरीज भर्ती हो रहे हैं. चूंकि, मुल्क में गरीब और बेसघर आबादी भी लाखों में है, इसलिए स्थिति ज्यादा चिंताजनक है.
40 लाख बच्चे टीकाकरण से वंचित, कैसे बचेंगे?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण अभियान में भारी लापरवाही और कमजोर नियंत्रण उपायों के कारण यह संकट पैदा हुआ है. पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक बे-नजीर अहमद के मुताबिक, करीब 40 लाख बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गए. इसके अलावा, टीकाकरण अभियान की लक्षित आयु सीमा से अधिक उम्र के बच्चों में भी यह संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं. मौजूदा सरकार इसे काबू नहीं कर पा रही. हताश लोगों द्वारा मस्जिदों में दुआ पढी जा रही हैं. वहीं, काफी नागरिक भारत से आस लगाए बैठे हैं. प्रकोप बढ़ने पर यूएन से जुड़ी टीम वहां जल्द जा सकती है.

खसरे की बीमारी: लक्षण और बचाव के उपाय
खसरा (Measles) पैरामिक्सोवायरस के कारण फैलने वाला एक अत्यधिक संक्रामक और खतरनाक वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से बच्चों को अपना शिकार बनाता है.
1. प्रमुख लक्षण (Symptoms):
- तेज बुखार और लगातार सूखी खांसी होना.
- नाक बहना, गले में खराश और आंखें लाल होना (कंजक्टिवाइटिस).
- मुंह के अंदर छोटे सफेद चकत्ते (कोप्लिक स्पॉट्स) दिखाई देना.
- संक्रमण के 3-5 दिन बाद चेहरे व गर्दन से शुरू होकर पूरे शरीर पर लाल दाने (रैशेज) निकलना.
2. बचाव और निवारण (Prevention):
- MMR / MR वैक्सीन: खसरे से सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका मीजल्स-रूबेला (MR) या MMR का टीका है. बच्चों को 9 महीने और 16-24 महीने की उम्र में इसकी दो खुराकें जरूर लगवाएं.
- विटामिन-A की खुराक: खसरे के मरीजों में गंभीर जटिलताओं को रोकने के लिए डॉक्टरों की सलाह पर विटामिन-A की खुराक दी जाती है.
- संक्रमित व्यक्ति से दूरी: मरीज को अलग कमरे में रखें और उसके द्वारा इस्तेमाल की गई चीजों को साफ-सुथरा रखें.
- सफाई और पोषण: हाथों की नियमित सफाई करें और मरीज को भरपूर तरल पदार्थ व पौष्टिक आहार दें.
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