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सिंगरौली के 243 सरकारी स्कूल जर्जर, हजारों बच्चों की पढ़ाई पर मंडरा रहा खतरा

Singrauli dilapidated government schools: सिंगरौली जिले के 243 सरकारी स्कूलों को विभागीय सर्वे में बेहद जर्जर और खतरनाक घोषित किया गया है. 30 साल पुराने भवनों के पुनर्निर्माण के लिए शिक्षा विभाग पिछले एक साल से DMF फंड का इंतजार कर रहा है.

Singrauli dilapidated government schools

Singrauli dilapidated government schools

Singrauli dilapidated government schools: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतें हजारों बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों के लिए बड़ा संकट बन गई हैं. विभागीय सर्वे में जिले के 243 स्कूल भवनों को अत्यंत जर्जर और खतरनाक श्रेणी में रखा गया है. इन भवनों की हालत ऐसी है कि इनमें पढ़ाई कराना जोखिम भरा माना जा रहा है. इसके बावजूद कई स्थानों पर छात्र-छात्राएं मौत के साये में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं.

विभागीय सर्वे ने बढ़ाई चिंता

जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष जिला परियोजना समन्वयक (DPC) कार्यालय की ओर से जर्जर स्कूल भवनों का सर्वे कराया गया था. सर्वे के दौरान एसडीओ इंजीनियर ने 243 स्कूलों को बेहद खतरनाक घोषित किया. रिपोर्ट में आशंका जताई गई कि इन भवनों की छत या दीवारों का मलबा कभी भी गिर सकता है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है. रिपोर्ट सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ गई. कुछ स्कूलों के बच्चों को पास के हाई स्कूल, मिडिल स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया है. हालांकि सीमित संसाधनों के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षकों को भी पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है.

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30 साल पुराने भवन बने परेशानी की वजह

बताया जा रहा है कि इन स्कूल भवनों का निर्माण वर्ष 1998-99 के दौरान तत्कालीन राजीव गांधी शिक्षा मिशन और ईजीएस (Education Guarantee Scheme) के तहत किया गया था. करीब तीन दशक पुराने इन भवनों का समय पर रखरखाव नहीं होने से उनकी स्थिति लगातार खराब होती गई और अब अधिकांश भवन उपयोग के लायक नहीं बचे हैं.

DMF फंड का इंतजार

जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण के लिए शिक्षा विभाग पिछले एक वर्ष से जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) फंड से राशि स्वीकृत कराने के प्रयास कर रहा है. इसके लिए संबंधित फाइलें विभिन्न स्तरों पर लंबित बताई जा रही हैं. स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार को जल्द से जल्द नए भवनों के निर्माण के लिए बजट जारी करना चाहिए, ताकि किसी संभावित दुर्घटना से पहले स्थायी समाधान हो सके.

भारत एक्सप्रेस



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