तमिलनाडु विधानसभा में इस बार एक ऐसा बदलाव देखने को मिला, जिसने राजनीतिक और संवैधानिक दोनों ही स्तरों पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. करीब 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद विधानसभा की कार्यवाही की शुरुआत राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से की गई. राज्यपाल के अभिभाषण से पहले जैसे ही राष्ट्रगान की धुन गूंजी, सदन में मौजूद सभी सदस्य सम्मान के साथ खड़े हो गए. इसे विधानसभा की परंपराओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है.
पिछले लगभग ढाई दशक से तमिलनाडु विधानसभा में कार्यवाही शुरू होने से पहले राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझ्थु’ गाया जाता था. राष्ट्रगान का स्थान सत्र के समापन पर तय था. लेकिन इस बार सरकार ने इस प्रोटोकॉल में बदलाव करते हुए राष्ट्रगान को सबसे पहले शामिल किया. इस बदलाव के बाद विधानसभा की कार्यवाही की शुरुआत राष्ट्रीय गीत की गरिमा के साथ हुई, जबकि राज्य गीत की परंपरा का भी सम्मान बरकरार रखा गया.
मुख्यमंत्री विजय ने दिया राष्ट्रीय एकता का संदेश
मुख्यमंत्री विजय ने इस फैसले को केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता से जुड़ा संदेश बताया. उन्होंने कहा कि हमारी सबसे पहली पहचान भारतीय होने की है. उनके मुताबिक, राष्ट्रगान देश की साझा पहचान और एकता का प्रतीक है, इसलिए विधानसभा जैसे लोकतांत्रिक मंच पर इसकी शुरुआत में प्रस्तुति होना राष्ट्रीय भावना को और मजबूत करता है.
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का उद्देश्य तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत को कमतर दिखाना नहीं है. राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश की परंपराओं और राष्ट्रीय प्रतीकों दोनों का समान सम्मान किया जाना चाहिए.
विवाद के बाद लिया गया फैसला
हाल के दिनों में राष्ट्रगान और राज्य गीत के क्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी चर्चा हुई थी. अलग-अलग पक्षों की राय सामने आने के बाद सरकार ने केंद्र के दिशानिर्देशों और संवैधानिक प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव लागू किया. माना जा रहा है कि इसी पृष्ठभूमि में विधानसभा की कार्यवाही शुरू करने के तरीके में संशोधन किया गया.
सदन में सकारात्मक प्रतिक्रिया
राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान राष्ट्रगान से शुरुआत होने को कई विधायकों ने सकारात्मक कदम बताया. उनका मानना है कि इससे राष्ट्रीय एकता का संदेश और अधिक मजबूत होकर सामने आता है. हालांकि, राज्य गीत और राष्ट्रगान के क्रम को लेकर पहले भी समय-समय पर बहस होती रही है, लेकिन इस बार सरकार ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु विधानसभा में किया गया यह बदलाव केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक फैसला भी है. करीब 25 साल बाद राष्ट्रगान की कार्यवाही की शुरुआत में वापसी को राज्य की विधायी परंपराओं में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है. कई वर्गों ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान का सकारात्मक संदेश बताया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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