पंजाब में सरकारी भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने इस मामले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने पंजाब में सामने आए पेपर लीक के 11 मामलों की जांच केंद्रीय स्तर पर कराने की अपील की है.
हरसिमरत बादल का कहना है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है, ताकि करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की सच्चाई सामने आ सके और उन लाखों युवाओं को न्याय मिल सके, जिनका भविष्य इन गड़बड़ियों की वजह से प्रभावित हुआ है. उन्होंने दावा किया कि करीब पांच लाख छात्र पेपर लीक की घटनाओं से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और उनके साथ अन्याय हुआ है.
अकाली दल की सांसद ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार पेपर लीक मामलों की गहराई से जांच कराने में रुचि नहीं दिखा रही है. उनका कहना है कि अगर सही तरीके से जांच हुई तो सरकार के कुछ मंत्रियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ सकती है.
उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए दोषियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है. उनके मुताबिक, पेपर लीक जैसी घटनाएं सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि हजारों युवाओं की मेहनत और उनके भविष्य को नुकसान पहुंचाती हैं.
हरसिमरत बादल ने कहा कि पंजाब के लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने अब तक जिम्मेदारी तय नहीं की है. उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (PSSSB) जैसे संस्थानों की कार्यप्रणाली में कई कमियां सामने आने के बावजूद जिम्मेदार लोगों पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई.
मंत्रियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग
हरसिमरत बादल ने सवाल उठाया कि शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस और स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह के खिलाफ कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया. उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड से जुड़े मामलों में अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है.
उन्होंने दावा किया कि लगातार सामने आ रही अनियमितताओं के कारण युवाओं का भरोसा सरकारी भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था से कमजोर हो रहा है. उनका कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों में भी व्यवस्था को लेकर अविश्वास बढ़ेगा.
हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है मामला
पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है. अदालत ने कुछ मामलों में भर्ती प्रक्रियाओं पर रोक लगाने जैसे कदम भी उठाए हैं. इनमें एक्साइज इंस्पेक्टरों की परीक्षा से जुड़ा मामला भी शामिल है.
हरसिमरत बादल ने गृह मंत्री अमित शाह को बताया कि राज्य सरकार सख्त कार्रवाई करने के बजाय मामलों को दबाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार कई बार पेपर लीक से इनकार करती रही है, जबकि खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 13 मार्च 2023 को पंजाब स्टेट टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (PSTET) का पेपर लीक होने की बात कही थी.
उन्होंने फार्मेसी ऑफिसर परीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि जांच में सामने आया था कि एक संगठित गिरोह ने कथित तौर पर उम्मीदवारों से प्रति व्यक्ति 13 लाख रुपये लिए और ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए उन्हें परीक्षा के जवाब उपलब्ध कराए. हालांकि, सरकार ने इसे पेपर लीक मानने से इनकार किया.
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-भारत एक्सप्रेस
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