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बर्मिंघम में फेंके जूते, तो जम्मू में फूंका पुतला! PoK में पाकिस्तान की बर्बरता पर किस कदर भड़का गुस्सा?

PoK में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के विरोध में बर्मिंघम और जम्मू में प्रदर्शन हुए. बर्मिंघम में पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन हुआ, जबकि जम्मू में प्रदर्शनकारियों ने असीम मुनीर का पुतला जलाया.

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर यानी पीओजेके में पाकिस्तानी सेना, रेंजर्स और वहां की कठपुतली हुकूमत द्वारा निहत्थे नागरिकों पर किए जा रहे बर्बर अत्याचारों(Pakistan Army violence POK) के खिलाफ अब दुनिया भर में ज्वाला सुलग उठी है. दरअसल रावलकोट समेत पूरे POK में पाकिस्तानी फौज द्वारा किए गए कत्लेआम और कड़े दमन चक्र के खिलाफ जहां एक तरफ जम्मू की सड़कों पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का पुतला फूंका गया, वहीं दूसरी तरफ ब्रिटेन के बर्मिंघम में भी प्रवासी कश्मीरियों ने पाकिस्तानी दूतावास के बाहर अपने जूते रखकर और पाकिस्तान आर्मी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर अपना भयंकर आक्रोश जताया है.

बर्मिंघम में पाक दूतावास के बाहर फेंके गए जूते

बता दें ब्रिटेन के बर्मिंघम शहर में स्थित पाकिस्तान वाणिज्य दूतावास के बाहर उस वक्त स्थिति बेहद विस्फोटक हो गई जब सैकड़ों की संख्या में ब्रिटिश कश्मीरी सड़कों पर उतर आए. रावलकोट और पीओजेके के अन्य हिस्सों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा निर्दोष लोगों की हत्याओं के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने अपने जूते-चप्पल निकालकर पाकिस्तानी दूतावास के मुख्य द्वार के सामने रख दिए.

इसके अलावा हाथों में तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना और जनरल असीम मुनीर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांग की कि पीओजेके में निर्दोष कश्मीरियों का कत्लेआम तुरंत बंद किया जाए.

 

जम्मू में सड़कों पर उतरे लोग

पीओजेके में जारी मानवाधिकारों के हनन और पाकिस्तानी रेंजर्स की बर्बरता के खिलाफ भारत के जम्मू शहर में भी जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला. शिवसेना कार्यकर्ताओं ने भारी संख्या में सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान विरोधी नारे लगाए और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का पुतला फूंका.

वहीं प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की शहबाज सरकार और उसकी खूनी सेना पीओजेके के नागरिकों का दमन करके उनके मौलिक अधिकारों को कुचल रही है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

PoJK की घर वापसी का उठा मुद्दा(Pakistan Army violence POK)

जम्मू में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने भारत सरकार से ऐतिहासिक कदम उठाने की पुरजोर वकालत की. उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1994 में भारतीय संसद ने सर्वसम्मति से एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित कर संपूर्ण पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर को भारत का अविभाज्य और अभिन्न अंग घोषित किया था.

प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से अपील की कि अब वह समय आ चुका है जब उस संसदीय प्रस्ताव को धरातल पर साकार किया जाए और सैन्य कार्रवाई या ठोस नीति के जरिए पीओजेके को पाकिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त कराकर भारत में शामिल किया जाए, ताकि वहां के लोगों को पाकिस्तानी जुल्मों से निजात मिल सके.

यह भी पढ़ें: ‘पाकिस्तानी कश्मीर जैसी कोई चीज नहीं…’, एजेंडा चला रहे अमरीकी अखबार को भारत ने कैसे लगाई लताड़?

फारूक अब्दुल्ला ने भी उठाई आवाज

पीओजेके के बिगड़ते हालातों (Pakistan Army violence POK) पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का भी बड़ा बयान सामने आया है. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पीओजेके भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस पर लगातार बातचीत होनी चाहिए.

वहीं उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग से अपील की कि वह पीओजेके में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों और मुद्दों को तुरंत सुलझाए. इसके साथ ही फारूक अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी इस मामले पर कूटनीतिक और राजनीतिक बातचीत की पहल करने का आग्रह किया.

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-भारत एक्सप्रेस



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