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करीब आठ दशक बाद आज मीरपुर और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में एक अलग तरह का संघर्ष दिखाई दे रहा है. पिछले कुछ वर्षों से वहां बिजली के बढ़ते बिल, महंगाई, गेहूं की कीमतों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं.

PoK में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के विरोध में बर्मिंघम और जम्मू में प्रदर्शन हुए. बर्मिंघम में पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन हुआ, जबकि जम्मू में प्रदर्शनकारियों ने असीम मुनीर का पुतला जलाया.

'द न्यूयॉर्क टाइम्स' द्वारा PoK को 'Pakistani Kashmir' लिखे जाने पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है. भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि यह भारत का अवैध रूप से पाकिस्तान के कब्जे वाला क्षेत्र है और 'पाकिस्तानी कश्मीर' जैसी कोई मान्यता नहीं है.

PoK Human Rights Violations: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में आम जनता पर ढहाए जा रहे जुल्‍म के विरुद्ध 'जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' ने पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर को खुला खत भेजा है. पीओके में सैन्य जुल्म और बेगुनाहों की हत्याएं रोकने की मांग की गई है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भले ही आज सिंध भारत का हिस्सा नहीं है, लेकिन उसकी सभ्यता और संस्कृति हमेशा भारत से जुड़ी रहेगी. उन्होंने सीमाओं के बदलने की संभावना का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्य में सिंध भारत में लौट सकता है.

PoJK में पिछले 72 घंटों से विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. AAC के नेतृत्व में हो रहे आंदोलन में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी से 12 नागरिकों की मौत हो गई है और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.

India-Pakistan Tensions: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में भारत के हमले के डर से 1000 से अधिक मदरसे 10 दिनों के लिए बंद किए गए हैं. इन मदरसों का इस्तेमाल आतंकवादियों के ठिकाने के रूप में होता था.

पाकिस्तान से आजाद होने की छटपटाहट POK (पाक अधिकृत कश्मीर) के लोगों में बढ़ती जा रही है. पाकिस्तान की सरकार का रवैया हमेशा से यहां के लोगों को लेकर निराशाजनक रहा है.

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कहा कि बढ़ती आतंकवादी हिंसा और कश्मीर विवाद को बढ़ावा देने के पाकिस्तान के प्रयासों के बाद, भारतीय संसद के प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया था कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान को अपने कब्जे वाले हिस्सों को खाली करना होगा.

पाकिस्तान सरकार की ओर से यह घोषणा इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) के समक्ष की गई, जब वह कश्मीरी कवि और पत्रकार अहमद फरहाद शाह के अपहरण मामले की सुनवाई कर रहा था.