Bijnor Prabal Agarwal Murder: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के बहुचर्चित प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में 14 साल लंबे चले कानूनी संघर्ष के बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कारोबारी पिता-पुत्र समेत सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही अदालत ने सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी ठोका है.
बेटी से बात करने पर की थी पिटाई
यह सनसनीखेज घटना 19 दिसंबर 2012 की है. महाराजा अग्रसेन जयंती समारोह के दौरान 18 साल के प्रबल अग्रवाल की बातचीत एक स्थानीय कारोबारी की बेटी से हो रही थी. इसी बात से नाराज होकर कारोबारी संजय अग्रवाल, उनके बेटे विनय अग्रवाल और सहयोगियों ने प्रबल की बेदर्दी से पिटाई कर दी. गंभीर चोटों के कारण प्रबल की मौत हो गई.
घटना को छुपाने के लिए आरोपियों ने प्रबल के शव को कार से ले जाकर गंगा नदी में बहा दिया. घटना के 27 दिन बाद, 15 जनवरी 2013 को प्रबल का शव गंगा किनारे से बरामद हुआ था.
सदमे में गई माता-पिता की जान
जवान बेटे की हत्या का सदमा परिवार बर्दाश्त नहीं कर सका. घटना के छह महीने बाद प्रबल के पिता आलोक अग्रवाल की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई और कुछ ही समय बाद मां का भी निधन हो गया.
पूरे परिवार में अकेली बची बहन प्राची अग्रवाल ने हिम्मत नहीं हारी और भाई को न्याय दिलाने का बीड़ा उठाया. शुरुआत में कई दिक्कतें आईं, लेकिन एडवोकेट मोहम्मद जकावत के साथ मिलकर प्राची ने कानूनी लड़ाई जारी रखी.
305 पेशियां और 17 गवाह
करीब 14 साल तक चले इस लंबे ट्रायल के दौरान 305 पेशियां हुईं और 17 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. आखिरकार अदालत ने सातों आरोपियों को हत्या, अपहरण और सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. कोर्ट ने जुर्माने की राशि का 90 फीसदी हिस्सा प्राची अग्रवाल को देने का आदेश दिया है.
फैसले के बाद भावुक प्राची ने कहा कि उन्हें न्याय तो मिला, लेकिन उनकी इच्छा दोषियों के लिए फांसी की सजा की थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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