Road Accident (AI IMAGE)
Road Accidents Report: जब भी कोई सड़क हादसा होता है, तो अक्सर सारा दोष तेज रफ्तार या ड्राइवर की लापरवाही पर मढ़ दिया जाता है. लेकिन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की नई रिपोर्ट एक कड़वी और डरावनी सच्चाई बयां करती है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में खराब सड़कें, गड्ढे, अधूरे निर्माण और इंजीनियरिंग की खामियां हर दिन औसतन 80 लोगों की जान ले रही हैं. यानी सिर्फ सुरक्षित गाड़ी चलाना काफी नहीं है, जब तक हमारे रास्ते सुरक्षित न हों.
आंकड़े जो डराते हैं: लगातार बढ़ रही दुर्घटनाएं
‘रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया’ रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि देश में सड़क हादसों का ग्राफ थमने का नाम नहीं ले रहा:
- 2024 में: 4.87 लाख से ज्यादा हादसों में 1.77 लाख से अधिक लोगों ने जान गंवाई.
- सड़क की खामियां: सिर्फ खराब डिजाइन और रखरखाव की कमी के चलते 10 हजार से अधिक हादसे हुए, जिनमें लगभग 29 हजार लोगों की मौत हुई.
- 2025-26 की स्थिति: हादसों का यह आंकड़ा 2025 में 5.13 लाख दुर्घटनाओं तक पहुंच गया. वहीं, 2026 में अब तक 2.96 लाख हादसे और 1.01 लाख से ज्यादा मौतें दर्ज की जा चुकी हैं.
किस राज्य में सबसे बुरा हाल?
हादसों के मामले में तमिलनाडु (39,666 हादसे) सबसे आगे रहा, जिसके बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक का नंबर आता है. हालांकि, हादसों में सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश (14,794 मौतें) में दर्ज की गईं.
ओवरस्पीडिंग आज भी हादसों का सबसे बड़ा कारण बनी हुई है, लेकिन ‘ड्राइवर का ध्यान भटकना’ और सड़कें खराब होना भी जानलेवा साबित हो रहा है. इतना ही नहीं, पैदल चलने वालों के लिए भी सड़कें सुरक्षित नहीं हैं; 2026 में अब तक 24 हजार से ज्यादा पैदल यात्रियों की जान जा चुकी है.
सुधार के लिए क्या कर रही है सरकार?
हादसों को रोकने के लिए सरकार ने AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) की मदद से राष्ट्रीय राजमार्गों पर 6,358 ‘ब्लैक कॉरिडोर’ की पहचान की है. इन जगहों पर साइन बोर्ड, क्रैश बैरियर, स्ट्रीट लाइट और सड़कें चौड़ी करने का काम चल रहा है. साथ ही सरकार शिक्षा, इंजीनियरिंग, प्रवर्तन और आपातकालीन देखभाल (4E स्ट्रैटेजी) पर काम कर रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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