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नौकरी देने से क्यों रोकें?’ करूर हादसे पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, बदला हाईकोर्ट का फैसला

Supreme Court: करूर भगदड़ हादसे के पीड़ितों के लिए बड़ी खबर! सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसने पीड़ित परिवारों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था…

Supreme Court relief for Tamil Nadu
Edited by Shubhra Rai

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति सी जोसेफ विजय को बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट करूर भगदड़ हादसे के पीड़ित परिवारों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने पर रोक वाले मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दिया है. जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश दिया है.

तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने के फैसले को रद्द कर दिया था. जिसके खिलाफ तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि नौकरी जैसे विषय पर जनहित याचिका पोषणीय नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों की मदद के लिए अनुकंपा नियुक्ति देना चाहती है, तो इसमें हाई कोर्ट को क्या आपत्ति हो सकती है? इसपर कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को इस त्रासदी से प्रभावित परिवारों को नौकरी देने से क्यों रोका जाना चाहिए? क्या ऐसी कोई वजह है? इससे पहले भी मुख्यमंत्री के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था.

41 लोगों की मौत,142 से अधिक घायल

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा था कि, कोर्ट मुख्यमंत्री के दौरे को कैसे नियंत्रित कर सकती है, भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों से मुलाकात को गवाहों को प्रभावित करना कैसे माना जा सकता है. कोर्ट ने कहा था कि मैं किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को पक्षकार कैसे बनाया जा सकता है? 41 लोगों की मौत हुई है. क्या यह सोचकर याचिका दायर की गई है? सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी. जांच की निगरानी पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है.

इस भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 142 से अधिक लोग घायल हो गए थे. एक्टर विजय के रोड शो के दौरान टीवीके के समर्थकों ने तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुचाया था. पुलिस ने इस घटना में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुचाने के आरोप में पार्टी सदस्यों के खिलाफ 9 एफआईआर दर्ज की है. जिसमें टीवीके के जिला सचिव भी शामिल हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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