देश में कैसे काबू में हैं पेट्रोल-डीजल के भाव? (AI IMAGE)
सोशल मीडिया और डिजिटल स्पेस में एक दावा तेजी से फैल रहा है कि भारत BRICS Pay के जरिए रूस और सऊदी अरब से डिस्काउंट पर कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें काबू में हैं. लेकिन जमीनी हकीकत और आंकड़ों पर नजर डालें, तो यह दावा पूरी तरह सही नहीं है.
भारत में ईंधन की कीमतें कम और स्थिर रहने की असली वजह सस्ते कच्चे तेल की खरीद, रणनीतिक आयात और सरकार का मूल्य नियंत्रण है.
देश में कैसे काबू में हैं पेट्रोल-डीजल के भाव?
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहने का सबसे बड़ा कारण रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल है. 2022 के बाद से पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस ने भारत को सस्ती दरों पर तेल की पेशकश की.
जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात रोजाना लगभग 26 लाख बैरल तक पहुंच गया, जो कुल क्रूड इंपोर्ट के आधे से भी ज्यादा था.
हालांकि, कच्चे तेल की बचत का हर एक पैसा सीधे आम उपभोक्ता तक नहीं पहुंचता. पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतों में क्रूड की लागत के अलावा रिफाइनरी मार्जिन, ट्रांसपोर्टेशन, डीलर कमीशन और केंद्र व राज्य सरकारों के भारी-भरकम टैक्स शामिल होते हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता को राहत देने के लिए कीमतों को स्थिर रखा.
रूस के सस्ते तेल और सऊदी अरब का संतुलन
भारतीय रिफाइनरी कंपनियां सिर्फ हेडलाइंस देखकर नहीं, बल्कि डिलीवरी लागत के हिसाब से तेल खरीदती हैं. रूस से तेल मंगवाने में भाड़ा और बीमा महंगा पड़ता है, फिर भी सऊदी अरब के आधिकारिक रेट के मुकाबले रूसी तेल काफी किफायती पड़ता है.
इसके बावजूद भारत केवल एक देश पर निर्भर नहीं रह सकता. ऊर्जा सुरक्षा और रिफाइनरियों की जरूरतों को देखते हुए सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों से भी तेल आयात जारी रखा गया है.
BRICS Pay के दावे का सच
वर्तमान में ऐसा कोई आधिकारिक सबूत नहीं है जो यह साबित करे कि भारत, रूस या सऊदी अरब के साथ कच्चे तेल का मुख्य भुगतान BRICS Pay के जरिए कर रहा है. भारत-रूस के बीच गैर-डॉलर और स्थानीय मुद्रा में व्यापार की बातचीत जरूर हुई है, लेकिन BRICS Pay के जरिए बड़े पैमाने पर तेल का लेन-देन होने की बात बेबुनियाद है.
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-भारत एक्सप्रेस
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