Sridevi Property Dispute Supreme Court Notice- bharat express
Sridevi Property Dispute: सुप्रीम कोर्ट ने प्रोड्यूसर बोनी कपूर और उनकी बेटियों जाह्नवी कपूर व खुशी कपूर को चेन्नई की एक प्रॉपर्टी से जुड़े पुराने विवाद में नोटिस जारी किया है. यह मामला दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी और उनके परिवार द्वारा खरीदी गई करीब 2.70 एकड़ जमीन से जुड़ा है. प्रॉपर्टी पर अधिकार को लेकर एम.सी. शिवकामी और उनके भाई एम.सी. नटराजन ने दावा किया है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और अरुण पिल्लई की बेंच ने शिवकामी और नटराजन की याचिका पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों को अगली सुनवाई तक विवादित प्रॉपर्टी पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया. कोर्ट ने दोनों पक्षों को बातचीत या मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने का सुझाव भी दिया. इसके लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की निगरानी में मध्यस्थता प्रक्रिया कराने का प्रस्ताव रखा गया है. मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी, जहां कोर्ट मध्यस्थता की प्रगति की समीक्षा करेगा.
पहले कपूर परिवार के पक्ष में आया था फैसला
इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट पहले कपूर परिवार के पक्ष में फैसला सुना चुका है. 20 अप्रैल को हाई कोर्ट ने कपूर परिवार की रिविजन याचिका स्वीकार करते हुए शिवकामी और नटराजन की ओर से दायर सिविल मुकदमे को खारिज कर दिया था. हाई कोर्ट ने माना था कि 1988 के प्रॉपर्टी लेन-देन को चुनौती देने वाला मुकदमा समय-सीमा यानी लिमिटेशन के कारण आगे नहीं बढ़ सकता. अदालत ने यह भी कहा था कि उपलब्ध दलीलों के आधार पर वादियों के दावों में पर्याप्त कानूनी आधार नहीं दिखता.
शोलिंगनल्लूर में स्थित है विवादित जमीन
मद्रास हाई कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, विवादित जमीन चेन्नई के शोलिंगनल्लूर इलाके में सर्वे नंबर 1/1B पर स्थित है. याचिकाकर्ताओं ने खुद को दिवंगत एम.सी. चंद्रशेखरन का कानूनी वारिस बताते हुए जमीन को पांच बराबर हिस्सों में बांटने की मांग की है. उन्होंने 19 अप्रैल 1988 को राजेश्वरी, श्रीलता और श्रीदेवी के पक्ष में किए गए सेल डीड और बाद के प्रॉपर्टी लेन-देन को भी चुनौती दी है.
यह भी पढ़ें: दिशा सालियान केस में ‘मिस्ट्री गर्ल’ की एंट्री, अस्पताल ले जाने वाली लड़की कौन? CBI जांच में नया मोड़
1988 के लेन-देन पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि हाई कोर्ट ने कानूनी वारिस होने और चंद्रशेखर की कथित दूसरी शादी की वैधता जैसे सवालों पर विचार किया, जबकि उस स्तर पर मुख्य सवाल यह होना चाहिए था कि मुकदमे को शुरुआती चरण में खारिज किया जा सकता है या नहीं. वहीं, कपूर परिवार की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मूल प्रॉपर्टी लेन-देन वर्ष 1988 में हुआ था, जबकि मौजूदा मुकदमा 2025 में दायर किया गया. अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और प्रस्तावित मध्यस्थता पर नजर रहेगी.
भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



