Urdu Conclave 2026

उर्दू एक मॉडर्न जुबान है, AI से और मजबूत होगा भविष्य- बज़्म-ए-सहाफत में बोले प्रोफेसर शाहिद सिद्दीकी

Bazm-e-Sahafat Bharat Express: भारत एक्सप्रेस उर्दू के बज़्म-ए-सहाफत में प्रो. शाहिद सिद्दीकी ने कहा कि उर्दू एक मॉडर्न जुबान है.

Urdu is a modern language – Shahid Siddiqui

उर्दू एक मॉडर्न जुबान है- शाहिद सिद्दीकी

Bharat Express Bazm e Sahafat: दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में आयोजित ‘भारत एक्सप्रेस उर्दू’ के तीसरे राष्ट्रीय कॉन्क्लेव ‘बज़्म-ए-सहाफ़त’ में प्रोफेसर शाहिद सिद्दीकी ने शिरकत की. इस दौररान उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया का जमाना है और प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की आदतें तेजी से बदल रही हैं. ऐसे माहौल में उर्दू को आगे बढ़ाने के लिए नए तरीकों की जरूरत है.

उर्दू एक मॉडर्न जुबान- सिद्दीकी

सिद्दीकी ने कहा कि उर्दू एक मॉडर्न जुबान है. यह 19वीं और 20वीं शताब्दी की भाषा है और अभी अपनी युवा अवस्था में है. उन्होंने बताया कि उर्दू बदलने को तैयार है और एआई जैसी तकनीक से इसका भविष्य और मजबूत होगा.

तकनीक से आसान होगी उर्दू- सिद्दीकी

उन्होंने कहा कि पहले लोगों को उर्दू स्क्रिप्ट पढ़ने में दिक्कत होती थी, लेकिन अब तकनीक से यह समस्या खत्म हो जाएगी. ग़ज़लें, मजमून और उर्दू अल्फाज़ को एक बटन दबाकर देवनागरी, रोमन या कन्नड़ में देखा जा सकेगा. यह भाषाओं का मिलन है और उर्दू को आधुनिक युग के साथ जोड़ता है.

युवाओं का जुड़ाव

प्रोफेसर शाहिद सिद्दीकी ने कहा कि आज के युवाओं को उर्दू से जोड़ने के लिए जश्न-ए-रेख्ता जैसे आयोजन अहम हैं. उन्होंने बताया कि पूरे देश में किसी भाषा का इतना बड़ा उत्सव नहीं होता, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं. अंग्रेजी बोलने वाले युवा भी उर्दू से जुड़ाव महसूस करते हैं क्योंकि यह भाषा दिल और दिमाग को छूती है.

उर्दू और हिंदी दोनों बहन- शाहिद सिद्धीकी

उन्होंने कहा कि उर्दू और हिंदी दोनों बहन भाषाएं हैं. दोनों में सिर्फ स्क्रिप्ट का अंतर है, बाकी शब्द और व्याकरण लगभग समान हैं. हिंदी फिल्मों का 90% हिस्सा उर्दू में होता है क्योंकि उर्दू बोली जाने पर और भी खूबसूरत लगती है.

‘राजनीति ने पैदा किया उर्दू और हिंदी में अंतर’

सिद्दीकी ने कहा कि उर्दू और हिंदी में कभी कोई फर्क नहीं था. यह अंतर राजनीति ने पैदा किया, लेकिन अब यह खत्म हो रहा है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई रोमन में उर्दू लिखे तो भी वह उर्दू ही रहेगी, अंग्रेजी नहीं बन जाएगी.

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प्रोफेसर शाहिद सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि उर्दू सिर्फ भाषा नहीं बल्कि एक तहज़ीब और संस्कृति है. यह हिंदी की तरह ही भारतीय समाज का हिस्सा है और तकनीक के साथ मिलकर आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि उर्दू का भविष्य उज्ज्वल है और यह आने वाले समय में और भी व्यापक रूप से स्वीकार की जाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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