Nithari Case: भारत के सबसे चर्चित निठारी हत्याकांड का मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली आखिरकार फांसी के फंदे तक पहुंच ही गया. हालांकि, यह फांसी मेरठ जेल में नहीं हुई, बल्कि शुक्रवार को हरिद्वार में हुई. करीब 19 साल जेल में काटने और 2025 में सुप्रीम कोर्ट से सभी आरोपों से बरी होने के बाद कोली हरिद्वार में एक छोटी सी चाय की दुकान चला रहा था, जहां वह फंदे से लटका मिला.
आधी रात को टली थी फांसी
बता दें कि सितंबर 2014 में मेरठ जेल में सुरेंद्र कोली को फांसी देने की पूरी तैयारी हो चुकी थी. 8 सितंबर की सुबह उसे फांसी दी जानी थी, लेकिन 7 सितंबर की देर रात वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एआर दवे और जस्टिस एचएल दत्त की बेंच ने देर रात 1 बजे कोली की फांसी पर रोक लगा दी.
जनवरी 2015 में दया याचिका पर फैसले में देरी के आधार पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया.
कैसे कमजोर पड़ा सीबीआई का केस?
निठारी कांड का खुलासा दिसंबर 2006 में हुआ था, जब मोनिंदर सिंह पंधेर के D-5 बंगले के पास नाले से इंसानी अवशेष मिले थे. निचली अदालतों ने कोली को 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई थी.
अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट और आखिरकार 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि कोली का कबूलनामा पुलिस कस्टडी में प्रताड़ना देकर लिया गया था. फॉरेंसिक जांच और साक्ष्यों की कड़ी में कई गंभीर खामियां थीं, जिसके बाद कोर्ट ने उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया.
जेल से रिहाई और गुमनामी में मौत
12 नवंबर 2025 को ग्रेटर नोएडा की कसना जेल से रिहा होने के बाद कोली हरिद्वार चला गया और गुमनामी की जिंदगी जीने लगा. लेकिन रिहाई के एक साल के भीतर ही शुक्रवार को वह अपनी दुकान में मृत पाया गया.
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-भारत एक्सप्रेस
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