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रूसी संसद के लिए मतदान शुरू, कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में भी वोटिंग, जानें क्यों है ये चुनाव खास?

Russia Duma Elections 2026: रूस में 18 से 20 सितंबर तक स्टेट ड्यूमा चुनाव हो रहे हैं. यह फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है.

Voting for the Russian parliament

रूसी संसद के लिए मतदान

Russia Duma Elections 2026: रूस में 18 से 20 सितंबर तक स्टेट ड्यूमा यानी संसद के निचले सदन के चुनाव हो रहे हैं. यह चुनाव खास इसलिए है क्योंकि फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद यह पहला संसदीय चुनाव है. इसलिए इसे केवल सांसद चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि रूस की घरेलू राजनीति, यूक्रेन युद्ध और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शासन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है.

ड्यूमा की संरचना और वोटिंग

रूस की स्टेट ड्यूमा में कुल 450 सीटें हैं. इनमें से 225 सीटें पार्टी लिस्ट से और बाकी 225 सीटें निर्वाचन क्षेत्रों से चुनी जाती हैं. सांसदों का कार्यकाल पांच साल का होता है. इस बार लगभग 11.1 करोड़ लोग वोट डालने के पात्र हैं. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की सुविधा भी दी गई है. साथ ही 11 क्षेत्रों में गवर्नर और 39 क्षेत्रों में क्षेत्रीय विधानसभाओं के चुनाव भी हो रहे हैं.

यूनाइटेड रूस का दबदबा

सत्तारूढ़ पार्टी यूनाइटेड रूस 2001 में बनी थी और तब से पुतिन की राजनीति का अहम हिस्सा रही है. 2021 में पार्टी ने 300 से ज्यादा सीटें जीती थीं. वर्तमान में उसके पास 326 सीटें हैं. पार्टी के लिए 300 सीटें बनाए रखना संवैधानिक बदलावों के लिहाज से बेहद जरूरी है. इस बार पार्टी की लिस्ट में विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन जैसे बड़े नाम शामिल हैं.

विपक्षी पार्टियों की स्थिति

यूनाइटेड रूस के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी (KPRF) लंबे समय से दूसरी बड़ी ताकत रही है. इसके नेता गेन्नादी ज्युगानोव सरकार की कुछ नीतियों की आलोचना करते हैं, लेकिन पुतिन पर सीधी टिप्पणी से बचते हैं और युद्ध का समर्थन करते हैं. LDPR और A Just Russia भी युद्ध समर्थक पार्टियां हैं. वहीं New People पार्टी खुद को युवा और टेक्नोक्रेट मतदाताओं के करीब दिखाने की कोशिश कर रही है.

Yabloko पार्टी पर विवाद

इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा Yabloko पार्टी की हो रही है. यह युद्ध का विरोध करने वाली प्रमुख पार्टी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इसे पार्टी लिस्ट से बाहर कर दिया गया. हालांकि इसके कुछ उम्मीदवार सिंगल-मेंबर सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं. इस फैसले ने विपक्ष और युद्ध-विरोधी राजनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

चुनाव में असली सवाल

इस बार अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान सिर्फ यह देखने पर नहीं है कि यूनाइटेड रूस सत्ता में रहती है या नहीं, बल्कि यह भी कि उसे कितने वोट और सीटें मिलती हैं. 2021 में मतदान करीब 51.7% था. इस बार आर्थिक दबाव और युद्ध की लागत भी चुनावी माहौल का हिस्सा हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि नाराज वोटर्स कम्युनिस्ट पार्टी या New People की ओर जा सकते हैं.

कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में वोटिंग

इस बार रूस ने उन यूक्रेनी क्षेत्रों में भी मतदान कराया है, जिन पर उसका कब्जा है. यूक्रेन और उसके सहयोगी इस प्रक्रिया को मान्यता नहीं देते. इससे चुनाव सीधे रूस-यूक्रेन युद्ध और क्षेत्रीय विवाद से जुड़ गया है.

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कुल मिलाकर, 2026 का यह चुनाव केवल सांसद चुनने की प्रक्रिया नहीं है. इसमें संसद की संरचना, यूनाइटेड रूस का दबदबा, युद्ध के प्रति राजनीतिक समर्थन, आर्थिक असंतोष, विपक्ष की स्थिति और कब्जे वाले क्षेत्रों में मतदान सभी जुड़े हुए हैं. 21 सितंबर को नतीजे आने के बाद तस्वीर और साफ होगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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