Baba Bageshwar Golden Khadau Controversy
Baba Bageshwar Golden Khadau Controversy: बाबा बागेश्वर के नाम से मशहूर धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर अपनी ‘सोने की खड़ाऊ’ वाली चर्चा को लेकर सुर्खियों में हैं. कथा के दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर अपने आलोचकों को कड़े शब्दों में जवाब दिया. उन्होंने कहा कि अगर उनकी खड़ाऊ को लेकर इतना ही चर्चा हो रही है, तो अगली बार वह डायमंड की खड़ाऊ बुक कर लेंगे. उन्होंने चुनौती भरे अंदाज में कहा कि आलोचकों को लगता है कि वह ऐसी बातों से डर जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं है.
‘अगली बार डायमंड की खड़ाऊ बुक करेंगे’
धीरेंद्र शास्त्री ने कथा के दौरान कहा, “जिस दिन तुमने हमारे सोने की खड़ाऊं का जिक्र किया, उस दिन डायमंड की बुक करेंगे.” उन्होंने आगे कहा कि उनके पास ऐसी शक्ति है कि उन्हें इन बातों की चिंता करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने अपने आलोचकों से कहा कि उन्होंने गलत व्यक्ति से पंगा लिया है और वह इस तरह की टिप्पणियों से डरने वाले नहीं हैं.
‘हम माया-मोह छोड़ने वाले बाबा नहीं हैं’
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान में माया-मोह को लेकर भी अपनी सोच स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि वह माया-मोह छोड़ने वाले बाबा नहीं हैं. उनके मुताबिक, वह लोगों को माया-मोह छोड़ने का प्रवचन नहीं देते, बल्कि मेहनत से कमाने और उस कमाई को परमात्मा की सेवा में लगाने की बात करते हैं. उन्होंने कहा कि अगर हर कोई बाबा बन जाए और माया-मोह छोड़ दे, तो देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा. उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि वह ऐसी बातें नहीं करते, जिन पर खुद अमल न कर सकें.
“हमसे पंगा मत लो।अगली बार सोने की खड़ाऊ की बात की तो डायमंड के खड़ाऊ पहन के आएंगे।
हम माया मोह छोड़ने वाले बाबा नही हैं छोड़ें क्यों? छुड़वाएं क्यों? सब लोग बाबा बन जाएंगे तो डॉलर 200 रुपए का न हो जाएगा?
दोगलापंथी हमसे ना हो पाएगा। कुत्ता को कुत्ता ही कहेंगे कुत्ताजी नहीं कहेंगे।”– बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
— Mukesh Mathur (@mukesh1275) September 20, 2026
‘हम दोगलापंती नहीं कर पाएंगे’
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कुछ लोग प्रवचन में माया-मोह को बेकार बताते हैं, लेकिन दूसरी तरफ वही चीजें स्वीकार भी करते हैं. उन्होंने इसे दोगलापंती बताते हुए कहा कि वह इस तरह की दोहरी बातें नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि वह चीजों को जिस रूप में देखते हैं, उसी तरह स्पष्ट शब्दों में कहते हैं.
कैसे शुरू हुआ ‘सोने की खड़ाऊ’ विवाद?
यह पूरा मामला तब चर्चा में आया था, जब धीरेंद्र शास्त्री उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया में गणेश उत्सव के दौरान पहुंचे थे. उस दौरान उनकी कुछ तस्वीरें सामने आईं, जिनमें उनके पैरों में चमकीली खड़ाऊ नजर आई. सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में इसे ‘सोने की खड़ाऊ’ बताया गया. हालांकि, धीरेंद्र शास्त्री पहले ही इस दावे पर सफाई दे चुके हैं. उन्होंने कहा था कि वह खड़ाऊ सोने की नहीं, बल्कि लकड़ी की है, जिस पर पेंट किया गया है.
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बाबा ने पहले भी दी थी सफाई
धीरेंद्र शास्त्री ने बताया था कि एंटीलिया में गणेश उत्सव के दौरान उनकी खड़ाऊ को देखकर किसी ने इसे सोने की बता दिया और इसके बाद यह बात चर्चा में आ गई. उन्होंने कहा था कि लकड़ी की खड़ाऊ पर पेंट किया गया था और इसी वजह से वह चमकीली दिखाई दे रही थी. उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें इतना ज्ञान जरूर है कि सोना पैरों में नहीं पहना जाता. अब एक बार फिर दिए गए बयान के बाद ‘सोने की खड़ाऊ’ का मुद्दा चर्चा में आ गया है.
भारत एक्सप्रेस
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