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कोयला तस्करों का नेटवर्क ध्वस्त! झारखंड की मगध-आम्रपाली खदानों में CISF का बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक

Jharkhand News: झारखंड की सबसे बड़ी मगध और आम्रपाली खदानों समेत विभिन्न कोयला क्षेत्रों में CISF और स्थानीय पुलिस की सख्ती से कोयला माफियाओं पर शिकंजा कस गया है. ‘जीरो कोल लीकेज’ योजना और आधुनिक तकनीक से अवैध खनन व तस्करी के नेटवर्क पर करारी चोट की गई है.

झारखंड कोयला चोरी पर CISF का एक्शन
Edited by Shubhra Rai

Jharkhand News:मधुकर आनंद/ झारखंड : मगध एवं आम्रपाली जैसी झारखंड की सबसे बड़ी खदानों के साथ झारखंड की अन्य कोयला खदानों में लंबे समय से चुनौती बनी रही कोयला चोरी और अवैध खनन पर अब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की सख्ती का असर दिखाई देने लगा है. खदान क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने, तकनीक आधारित निगरानी बढ़ने और स्थानीय पुलिस एवं कोल कंपनियों के साथ संयुक्त कार्रवाई तेज होने से अवैध कोयला कारोबार पर दबाव बढ़ा है.

हाल के महीनों में CISF ने झारखंड के कोयला क्षेत्रों में लगातार छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई की है. केंद्र सरकार की ओर से जुलाई 2026 में जारी आंकड़ों के अनुसार, तीन सप्ताह के विशेष अभियान में CISF ने सुरक्षा घेरे में आने वाले कोयला क्षेत्रों से करीब 1,798.725 मीट्रिक टन अवैध रूप से खनन, भंडारण या परिवहन किया जा रहा कोयला जब्त किया है. इसकी अनुमानित कीमत करीब 1.08 करोड़ रुपये बताई गई. इस दौरान 84 वाहनों को भी जब्त किया गया और 21 मामलों में सीधे शिकायत दर्ज की गई.

शून्य से शिखर तक चल रही है कार्रवाई, भारी मात्रा में अवैध कोयला जब्त

इस अभियान में झारखंड के भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) क्षेत्र से ही 1,063.91 मीट्रिक टन कोयला जब्त किया गया. वहीं सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) से 284.715 मीट्रिक टन कोयला जब्त क्या गया. इतनी सफलताओं के बावजूद इस मामले में कार्रवाई लगातार जारी है. रामगढ़ जिले के कुज्जू क्षेत्र में 7 और 8 अगस्त को CISF, CCL प्रबंधन और CCL सुरक्षा कर्मियों की संयुक्त कार्रवाई में 866.152 मीट्रिक टन अवैध कोयला बरामद किया गया. इसकी अनुमानित कीमत करीब 40.99 लाख रुपये आंकी गई. कार्रवाई के दौरान अवैध खनन की सुरंग भी चिन्हित की गई.
ये आंकड़े बताते हैं कि अब कार्रवाई केवल खदान के गेट या परिवहन मार्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि जंगल और दूरदराज के इलाकों में छिपाकर रखे गए अवैध कोयले तथा अवैध खनन स्थलों तक भी सुरक्षा एजेंसियां पहुंच रही हैं.

तकनीक बढ़ाने की रणनीति ने दिलाई है सफलता

कोयला चोरी रोकने की रणनीति में तकनीक की भूमिका भी बढ़ी है. सरकार के अनुसार कोयला क्षेत्रों में CCTV निगरानी, कोयला परिवहन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग, मानव खुफिया जानकारी और संयुक्त फील्ड ऑपरेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे संदिग्ध गतिविधियों और संवेदनशील स्थानों की पहचान में मदद मिल रही है. पहले से ही कोयला चोरी रोकने के लिए RFID आधारित बैरियर, CCTV कैमरे, GPS/GPRS आधारित वाहन ट्रैकिंग, चेक पोस्ट और नियमित गश्त जैसी व्यवस्थाएं अपनाई जाती रही हैं. CISF और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई भी इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

जुलाई में बनी ‘जीरो कोल लीकेज’ की रणनीति

कोयला चोरी के खिलाफ केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में इसे और गंभीरता से लेते हुए ‘Zero Coal Leakage’ योजना पर जोर दिया. 5 जुलाई को हुई उच्चस्तरीय बैठक में अवैध कोयला खनन और चोरी की स्थिति की समीक्षा की गई तथा CISF की तैनाती को प्राथमिकता देने, संवेदनशील क्षेत्रों में क्विक रिस्पॉन्स टीम और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने तथा तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया गया. इसके बाद CISF को MMDR Act के तहत कुछ अतिरिक्त अधिकार मिलने से कार्रवाई का कानूनी पक्ष भी मजबूत हुआ. अधिकारियों को तलाशी लेने, अवैध रूप से खनन किए गए खनिज के भंडारण वाले स्थानों में प्रवेश करने और सक्षम न्यायालय के समक्ष सीधे शिकायत करने जैसी शक्तियां दी गई हैं.

चोरी पर असर, लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं

CISF की बढ़ी सक्रियता से यह संकेत जरूर मिलता है कि अवैध कोयला कारोबार के लिए परिस्थितियां पहले की तुलना में कठिन हुई हैं. लगातार छापेमारी, जब्ती और अवैध परिवहन में इस्तेमाल वाहनों पर कार्रवाई से तस्करी के नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है.

हालांकि, बड़ी मात्रा में अवैध कोयले की लगातार बरामदगी यह भी बताती है कि समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है. जुलाई और अगस्त 2026 में हुई कार्रवाइयों में बड़ी मात्रा में कोयला बरामद होना इसका प्रमाण है. इसलिए केवल खदानों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि अवैध खनन स्थलों, भंडारण केंद्रों, परिवहन मार्गों और अंतिम खरीदारों तक कार्रवाई की श्रृंखला को मजबूत करना जरूरी होगा.

आसान नहीं है आगे की राह, स्थाई समाधान की है जरूरत

झारखंड के लिए कोयला केवल एक खनिज नहीं, बल्कि राज्य और देश की ऊर्जा एवं औद्योगिक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है. ऐसे में कोयले की चोरी पर प्रभावी नियंत्रण से सरकारी और कोयला कंपनियों के राजस्व की रक्षा के साथ-साथ वैध खनन व्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है.

फिलहाल CISF, कोल इंडिया की सहायक कंपनियों, जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वित कार्रवाई ने कोयला चोरी के खिलाफ अभियान को नया तेवर दिया है. आने वाले समय में इस कार्रवाई की सफलता इस बात से तय होगी कि क्या लगातार निगरानी और प्रवर्तन के जरिए अवैध खनन तथा चोरी के स्रोतों को स्थायी रूप से बंद किया जा सकता है? झारखंड के कोयला क्षेत्रों में फिलहाल तस्वीर यही संकेत दे रही है कि सुरक्षा का घेरा जितना मजबूत हो रहा है, कोयला चोरी का रास्ता उतना ही मुश्किल होता जा रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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