पीएम मोदी ने देश में जल सुरक्षा और जलवायु-अनुकूल जल प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल द्वारा लिखे गए एक महत्वपूर्ण लेख को साझा किया है. प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में स्पष्ट किया है कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल को सुरक्षित रखना केवल प्रशासनिक जिम्मा नहीं, बल्कि मजबूत प्रणालियों, वैज्ञानिक समाधानों और जन भागीदारी से जुड़ी एक बड़ी ‘साझा जिम्मेदारी’ है.
जल जीवन मिशन और नमामि गंगा की सफलता
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए दृष्टिकोण के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने अपने लेख में भारत द्वारा उठाए जा रहे उन तमाम कदमों का विस्तार से जिक्र किया है जो देश को जल-सुरक्षित बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं. इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं.
Water security is a shared responsibility that calls for stronger systems, scientific solutions and Jan Bhagidari. Union Minister Shri @CRPaatil writes on India’s efforts to build climate-resilient water management through the Jal Jeevan Mission, Namami Gange, water conservation… https://t.co/28BGdScIpL
— PMO India (@PMOIndia) September 22, 2026
- जल जीवन मिशन: घर-घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का यह अभियान ग्रामीण भारत में तस्वीर बदल रहा है.
- नमामि गंगा पहल: गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण और कायाकल्प के लिए वैज्ञानिक और जन-सहयोग आधारित अभियान.
- प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान: पानी की एक-एक बूंद के सदुपयोग और बर्बादी को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल.
जन भागीदारी से ही संभव है स्थायी समाधान
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह लेख इस बात का एक बेहद अंतर्दृष्टिपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है कि कैसे राज्यों, स्थानीय समुदायों और आम नागरिकों की सक्रिय जन भागीदारी मिलकर भविष्य की चुनौतियों से निपट सकती है. जब तक समाज का हर वर्ग जल संरक्षण को अपनी नैतिक जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक स्थायी जल सुरक्षा का लक्ष्य हासिल करना कठिन होगा. सरकार की योजनाएं तभी सफल होती हैं जब वह जन आंदोलन का रूप लेती हैं, और भारत आज इसी दिशा में तेजी से अग्रसर है.
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