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Anant Chaturdashi: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व मनाया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना के साथ-साथ दस दिनों तक चले गणेशोत्सव का गणपति विसर्जन के साथ समापन होता है. विधि-विधान से पूजा-अर्चना और अनंत सूत्र धारण करने से जीवन में सुख, समृद्धि और स्थायित्व का आगमन होता है.
अनंत चतुर्दशी का दिन भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और बप्पा को भावभिनी विदाई देने का अत्यंत पवित्र अवसर है. इस दिन सुबह और दोपहर के शुभ मुहूर्त में गणेश विसर्जन किया जा सकता है. 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण करने और पीली वस्तुओं के दान से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त
अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के लिए पंचांग के अनुसार दो प्रमुख शुभ समय प्राप्त हो रहे हैं. पहला शुभ मुहूर्त सुबह 7:50 बजे से 10:09 बजे तक है, जबकि दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 12:15 बजे से 4:15 बजे तक रहेगा. पूजा व विसर्जन के दौरान राहुकाल का ध्यान रखना आवश्यक है, जो सुबह 10:39 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक रहेगा. इस दौरान विसर्जन या नया कार्य करने से बचें.
भगवान विष्णु की पूजा और अनंत सूत्र का महत्व
ज्योतिषाचार्य आशिमा शर्मा के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजन करके 14 गांठों वाला रक्षासूत्र (अनंत सूत्र) धारण करने का विशेष महत्व है. पूजा संपन्न होने के बाद पुरुष इस सूत्र को दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं. मान्यता है कि इसे धारण करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और परिवार में शांति बनी रहती है.
अनंत चतुर्दशी की संपूर्ण पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान के पश्चात भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें. भगवान को पंचामृत से स्नान कराकर पीले पुष्प, रोली, अक्षत, फल, मिठाई और तुलसी दल अर्पित करें. इसके बाद ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें और अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा का श्रवण करें. पूजा के अंत में जरूरतमंदों को भोजन कराएं और पीले वस्त्र या मिठाई का दान करें.
घर पर गणेश विसर्जन की आसान विधि
ज्योतिषाचार्य ज्योति वृजवासी के अनुसार, जिन भक्तों ने घर में छोटी गणेश प्रतिमा स्थापित की है, वे घर पर ही विसर्जन कर सकते हैं. इसके लिए किसी बड़े शुद्ध बर्तन में साफ जल लें और उसमें थोड़ा गंगाजल व पुष्प मिलाएं. इसके बाद मंत्रोच्चार के साथ बप्पा की मूर्ति को विसर्जित करें. विसर्जन के बाद उस जल और मिट्टी को घर के पेड़-पौधों में अर्पित कर दें.
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-भारत एक्सप्रेस
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