कश्मीर के प्रमुख और खूबसूरत पर्यटन स्थलों में शुमार पहलगाम क्षेत्र की प्रसिद्ध ‘अरु घाटी’ (Aru Valley) इन दिनों बुनियादी नागरिक सुविधाओं की भारी किल्लत से जूझ रही है। प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पहचानी जाने वाली इस सुरम्य घाटी में आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को मोबाइल नेटवर्क, स्वास्थ्य सेवाएं, एटीएम और पर्याप्त सार्वजनिक शौचालयों जैसी आवश्यक सुविधाओं के न होने से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बिना रुके पहलगाम लौटने को मजबूर हो रहे सैलानी
आवश्यक सुविधाओं के अभाव के कारण घाटी में ठहरने का मन बनाकर आने वाले कई पर्यटक अपना प्रवास बीच में ही छोड़कर वापस पहलगाम लौटने पर विवश हैं। मोबाइल कनेक्टिविटी ठप रहने से सैलानियों का संपर्क दुनिया से कट जाता है, वहीं आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और नकदी की कमी के चलते यात्रा का आनंद परेशानी में तब्दील हो रहा है।
होटल कारोबारियों, दुकानदारों और पोनी चालकों की आजीविका पर संकट
पर्यटकों के समय से पहले लौटने का सीधा और प्रतिकूल प्रभाव स्थानीय पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अरु घाटी में होटल व्यवसायी, पोनी (टट्टू) संचालक, छोटे दुकानदार और टूरिस्ट गाइड पूरी तरह से पर्यटकों की आवाजाही पर निर्भर हैं। स्थानीय हितधारकों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी से पर्यटन कारोबार लगातार प्रभावित हो रहा है, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट गहराता जा रहा है।
प्राकृतिक स्वरूप बचाए रखते हुए देंगे सुविधाएं: पीडीए सीईओ
मामले को लेकर ‘भारत एक्सप्रेस’ से बातचीत करते हुए पहलगाम विकास प्राधिकरण (PDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हिलाल नुसरुल जेरी ने कहा कि प्रशासन अरु घाटी में आने वाले पर्यटकों को आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में सक्रियता से काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का मुख्य प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि घाटी का प्राकृतिक और अछूता स्वरूप बना रहे और यह कंक्रीट के जंगल में तब्दील न हो। वहीं, स्थानीय कारोबारियों ने प्रशासन से मांग की है कि पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ संचार, प्राथमिक स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए।
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