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सुप्रीम कोर्ट: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के 14 फैसलों को चुनौती, 5 अक्टूबर को सुनवाई

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के 14 आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 5 अक्टूबर को सुनवाई करेगा. कोर्ट आयोग के अधिकारों के दायरे पर फैसला करेगा.

Supreme Court Hearing On CEC Gyanesh Kumar Orders October 5
Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट आगामी 5 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर एक बेहद अहम सुनवाई करने जा रहा है. देश की सर्वोच्च अदालत की तीन जजों की पीठ, जिसमें सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं, इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करेगी.

राकेश कुमार सिंह और शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर इस याचिका में पिछले 10 महीनों के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा जारी 14 अलग-अलग आदेशों को सीधे चुनौती दी गई है.

आयोग को दरकिनार कर फैसले लेने का आरोप

दायर याचिका में मांग की गई है कि ज्ञानेश कुमार की ओर से जारी इन 14 आदेशों को रद्द किया जाए. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ये फैसले चुनाव आयोग की तय वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना लिए गए. आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कथित मंजूरी के बिना ही ये निर्णय लिए. दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच लिए गए इन 14 फैसलों पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति भी जताई थी.

कानून और संविधान के उल्लंघन का दावा

वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मामले की त्वरित सुनवाई पर जोर देते हुए कहा कि बहुसदस्यीय चुनाव आयोग में कोई भी फैसला सर्वसम्मति या बहुमत से होना चाहिए. संविधान के अनुच्छेद 324 और 32 के तहत आयोग की शक्तियां सामूहिक हैं, और मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले इनका इस्तेमाल नहीं कर सकते.

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठते हैं. अगर ये फैसले पूरे आयोग के सामूहिक नहीं हैं, तो एसआईआर के तहत की गई पूरी कार्रवाई शुरू से ही अवैध और शून्य घोषित की जानी चाहिए.

स्पष्टीकरण और सीमाएं तय करने की मांग

इस कानूनी जंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की चुनाव आयोग की शक्तियों के दायरे और सीमाओं पर स्थिति साफ करे. हालांकि, इस मामले में प्रिया मिश्रा नाम की एक अन्य याचिकाकर्ता ने भी याचिका दाखिल की है, लेकिन वह फिलहाल सुनवाई की सूची में शामिल नहीं है. 5 अक्टूबर को होने वाली इस सुनवाई पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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