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धरती के बाद अब अंतरिक्ष में AI की तैयारी! Google ने पहली बार भेजीं अपनी AI चिप्स, सूर्य की रोशनी से डेटा सेंटर चलाने का प्लान

Google AI Chips: दुनिया में चल रही एआई की अंधी रेस में अब गूगल ने बड़ी छलांग लगा दी है. कंपनी ने ऐसा प्रयोग शुरू किया है, जो आने वाले समय में पूरी दुनिया की तस्वीर बदल सकता है. कंपनी की तरफ से पहली बार एआई चिप्स को अंतरीक्ष में भेजा गया है. इस मिशन में गूगल यह समझने की कोशिश कर रहा है कि अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग किस तरह काम कर सकती है.

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धरती के बाद अब अंतरिक्ष में AI की तैयारी!

Google AI Chips: दुनिया में चल रही एआई की अंधी रेस में अब गूगल ने बड़ी छलांग लगा दी है. कंपनी ने ऐसा प्रयोग शुरू किया है, जो आने वाले समय में पूरी दुनिया की तस्वीर बदल सकता है. कंपनी की तरफ से पहली बार एआई चिप्स को अंतरीक्ष में भेजा गया है. इसका मकसद यह पता लगाना है कि क्या भविष्य में सूर्य की रोशनी से चलने वाले AI डेटा सेंटर धरती के बाहर बनाये जा सकते हैं.

गूगल ने ‘प्रोजेक्ट सनकैचर’ के तहत चार टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) चिप्स को अंतरिक्ष में भेजा है. रेफ्रिजरेटर के आकार का यह प्रोटोटाइप सैटेलाइट स्पेस X के Falcon 9 रॉकेट से कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग से लॉन्च किया गया.

पहली बार अंतरिक्ष में AI चिप्स का टेस्ट

इस मिशन में गूगल यह समझने की कोशिश कर रहा है कि अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग किस तरह काम कर सकती है. खास बात यह है कि सैटेलाइट को ऐसी कक्षा में रखा गया है, जहां उसके सोलर पैनल लगातार सूर्य की रोशनी में रहेंगे. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह सिर्फ एक परीक्षण है पर गूगल भविष्य को ध्यान में रखकर इसकी संभावनाएं तलाश रहा है.

सुंदर पिचाई को याद आई पहली मीटिंग

गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने इस लॉन्च को AI कंप्यूटिंग की दिशा में एक रोमांचक शुरुआत बताया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने उस पहली बैठक को याद किया, जिसमें अंतरिक्ष में कंप्यूटिंग क्षमता स्थापित करने का विचार सामने आया था.

पिचाई ने लिखा कि उन्हें वह बैठक अच्छी तरह याद है. वह बेहद रोमांचक विचार था. उन्होंने प्लैनेट लैब्स के साथ हुए सफल लॉन्च का जिक्र करते हुए कहा कि यह बताता है कि टीम अब तक कितना लंबा सफर तय कर चुकी है और अभी कितना आगे जाना बाकी है. उन्होंने सफल लॉन्च और एक और शानदार बूस्टर लैंडिंग के लिए SpaceX का भी आभार जताया.

100 से ज्यादा पेलोड के साथ अंतरिक्ष पहुंचा सैटेलाइट

यह सैटेलाइट प्लैनेट लैब्स (Planet Labs) के सहयोग से तैयार किया गया है. इसे स्पेस एक्स के ट्रांसपोर्टर-18 राइडशेयर मिशन के तहत लॉन्च किया गया. इसमें 100 से ज्यादा पेलोड भी मौजूद थे.

लॉन्च के बाद प्रोजेक्ट सनकैचर के प्रमुख ट्रैविस बील्स ने पुष्टि की कि टीम ने सैटेलाइट से संपर्क स्थापित कर लिया है और सैटेलाइट उम्मीद के मुताबिक काम कर रहा है.

हर समय नहीं चलेंगी AI चिप्स

सैटेलाइट के पूरी तरह ऑपरेशनल होने के बाद इसमें लगी TPU चिप्स गूगल के ओपन-वेट गेमा मॉडल के एक खास वर्जन को चलाएंगी. हालांकि अंतरिक्ष में गर्मी और बिजली की सीमाओं को देखते हुए चिप्स को लगातार नहीं चलाया जाएगा. उन्हें 15-15 मिनट के अंतराल पर चलाया जाएगा. गूगल इस मिशन को करीब एक साल तक जारी रखने का लक्ष्य लेकर चल रहा है.

अंतरिक्ष में डेटा सेंटर का आइडिया क्यों?

धरती पर AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटरों की बिजली खपत भी बढ़ रही है. इसके साथ ही कई जगहों पर बड़े डेटा सेंटरों को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध भी देखने को मिलता है.

इसी वजह से अंतरिक्ष में कंप्यूटिंग का विचार चर्चा में आया है. वहां सोलर पैनल के जरिए ऊर्जा हासिल की जा सकती है और सैटेलाइट को सूर्य के लगातार संपर्क वाली कक्षा में रखा जा सकता है. स्टारक्लाउड और स्पेस एक्स जैसे स्टार्टअप भी इस दिशा में काम कर रहे हैं.

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गूगल 81 सैटेलाइटों का एक समूह बनाने की योजना पर काम कर रहा है. ये सैटेलाइट आपस में लेजर के जरिए संचार करेंगे. इस नेटवर्क का पहला परीक्षण 2027 में प्रस्तावित है.

-भारत एक्सप्रेस



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