दिल्ली-एनसीआर में रेप पर एक्शन में सुप्रीम कोर्ट! दिल्ली पुलिस को दिया 4 हफ्ते का अल्टीमेटम
Supreme Court: दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में हुए रेप के मामले में लिए गए स्वतः संज्ञान पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से चार सप्ताह में स्टेट्स रिपोर्ट तलब किया है. जस्टिस जेबी पारदीवाला जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच 16 नवंबर को मामले में सुनवाई करेगा. कोर्ट ने दिल्ली में बढ़ते रेप और यौन अपराधों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस को पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने कहा कि पुलिस को खास तौर पर उन जगहों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, जहां महिलाएं ज्यादा असुरक्षित हो सकती है. इनमें बस स्टैंड, मेट्रो स्टेशन, रेलवे स्टेशन, स्कूल और कॉलेज शामिल है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस को नार्थ कैंपस और साउथ कैंपस पर भी खास ध्यान देना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि पुलिस को खुद पता है कि दिल्ली में कौन-कौन से इलाके अपराध के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से इलाकों का नियमित सर्वे करने को भी कहा है.
भारत में कागज पर बातें लिखना काफी नहीं- कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि पुलिस घर-घर जाकर यह पता कर सकती है कि वहां कौन-कौन से लोग रह रहे हैं. कोर्ट ने कहा जिस भी लड़की के साथ छेड़छाड़ होती है, वह हमारी बहन और हमारी मां है. कोर्ट ने कहा यह दिल्ली पुलिस विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है. ऐसी घटनाओं को न होने दे. कोर्ट ने कहा भारत जैसे देश में हैं, सिर्फ कागज पर बातें लिखना काफी नहीं है. आपको असल में कदम उठाने होंगे. अगर आपको थोड़ा और सख्त या कठोर होना पड़े तो हिचकिचाएं नहीं.
उन्होंने कहा कि कुछ लीग जीवन के अधिकार को लेकर हंगामा करेंगे, लेकिन आपको अपना फर्ज निभाना है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में यौन अपराधों से जुड़े मामलों की ट्रायल में देरी नही होनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह यह भी देखेगा कि ट्रायल कोर्ट में इन सभी मामलों की सुनवाई किस तरह आगे बढ़ रही है.
पुलिस से लोगों को भागना नहीं चाहिये
कोर्ट ने कहा कि लोगों को पुलिस से भागना नहीं चाहिए, बल्कि उनके पास जाकर अपनी बात रखने में भरोसा महसूस करना चाहिए. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि लोग अनुच्छेद 21 का हवाला देकर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन पुलिस की जो जिम्मेदारी है, उसे हर हाल में निभाना होगा.कोर्ट ने कहा कि हमारा मकसद यह होना चाहिए कि रेप और ऐसे दूसरे अपराध पूरी तरह खत्म हों.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पुलिस के पास पर्याप्त बल नहीं है तो नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाए. कोर्ट ने कहा कि पुलिसकर्मियों को उचित ट्रेनिंग देने पर भी जोर दिया जाए. कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में दिन और रात दोनों समय कड़ी निगरानी रखने को कहा है.कोर्ट ने कहा कि जवाबदेही सबसे अहम है और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी होगी. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के निर्भया केस का भी जिक्र किया. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि उन जगहों पर भी ध्यान दिया जाए जहां बिना अनुमति चल रहे खाने-पीने के ठिकानों पर शराब भी परोसी जाती है.
कानून लागू करने वालों की बताई नाकामी
कोर्ट ने कहा कि 2012 की घटना के रिकॉर्ड से पता चलता है कि आरोपियों ने कहीं खाना और शराब ली थी और उसके बाद अपराध किया था. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कानून-व्यवस्था की विफलता और सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा चिंताओं की ओर इशारा किया था. कोर्ट का कहना था कि जवाबदेही तय की जानी चाहिए, सिर्फ एकजुटता दिखाना काफी नहीं है. कोर्ट ने इन घटनाओं को कानून लागू करने वालों की नाकामी बताते हुए कहा था कि रोशनी की कमी, निगरानी ठीक से ना होना और ऐसी अन्य सुविधाओं के अभाव में सार्वजनिक जगह भी जोखिम भरी बन रही है.
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कोर्ट ने कहा था कि ये घटनाएं साफ तौर पर कानून लागू करने वाली एजेंसियों की नाकामी को दिखाता है. कोर्ट ने कहा था रोशनी की कमी, खराब निगरानी और दूसरी प्रशासनिक सुविधाओं के अभाव के कारण पार्क और बसों जैसी सार्वजनिक जगहों को ज्यादा जोखिम वाली जगहें नहीं बनने दिया जा सकता.
-भारत एक्सप्रेस
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