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मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन मामले में पटियाला हाउस कोर्ट से 17 छात्रों और पत्रकारों को मिली जमानत

पटियाला हाउस कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए 17 छात्रों और फ्रीलांस पत्रकारों को जमानत दे दी.

PATIALA HOUSE COURT

पटियाला हाउस कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी 17 छात्रों और फ्रीलांस पत्रकारों को जमानत दे दिया है. कोर्ट ने सभी को 15-15 हजार रुपए की निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती के आधार पर सभी को राहत दी है.

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) अनिमेष कुमार ने यह जमानत दी है. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने सभी आरोपियों की ओर से दायर जमानत का विरोध करते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की. इसपर कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी गंभीर है और प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी घायल भी हुआ है.

अदालत ने स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति को शांति पूर्वक विरोध करने का अधिकार है, लेकिन डियूटी के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करना या उनपर हमला करना स्वीकार नही किया जा सकता है. हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि मामले में लगाए गए सभी अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 132को छोड़कर सभी जमानती है. धारा 132 के तहत सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का एक इस्तेमाल करने का प्रावधान है. इसमें दो साल की सजा का प्रावधान है. कोर्ट ने आरोपियों को कम उम्र और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उन्हें राहत प्रदान की है.

कोर्ट ने कहा कि आरोपियों का पूरा कैरियर अभी उनके सामने है. दिल्ली पुलिस ने 5 अक्टूबर को अंशिका गुप्ता, करिश्मा मेहता, संजू, कुंजल, रुद्र प्रताप सिंह, रोहित, आदर्श, सनी देओल, बृजेश पांडेय, अदनान बरमारे, अनुज भगत, बुद्धशील थावरे, गजेंद्र सिंह, धर्मेंद्र, समर्थ सिंह, शेख यूनुस और अमन अग्रवाल को गिरफ्तार किया था.

सरकारी संपत्ति को नुकसान

पुलिस की दलील थी कि इन लोगों ने सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुचाया और निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद उसका उल्लंघन किया. पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने जांच में सहयोग नही किया और अपनी पहचान, माता-पिता तथा उम्र से जुड़ी पूरी जानकारी देने से इनकार किया. जबकि आरोपियों की ओर से पेश वकील साइमोन फारूकी ने गिरफ्तारी का विरोध करते हुए कहा कि लगाए गए सभी अपराधो में सात साल से कम की सजा का प्रावधान है, इसलिए गिरफ्तारी की जरूरत नही थी.

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने किसी आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट नही की है और करीब 50 प्रदर्शनकरियों में से केवल 17 लोगों को गिरफ्तार किया है. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने आरोपो से संबंधित सीसीटीवी फुटेज को कोर्ट के सामने पेश नही किया है.

गिरफ्तार किए गए अधिकांश आरोपी युवा छात्र है और वो अपने असहमति के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे. लंबे समय तक हिरासत में रखने से उनके कैरियर पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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