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दोस्ती में नई एनर्जी! अडानी पावर 770 MW प्रोजेक्ट के जरिए सर्दियों में भूटान को देगा बिजली, गर्मियों में भारत को मिलेगा फायदा

Adani Power: अडानी पावर और भूटान की सरकारी कंपनी ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन (DGPC) ने मंगलवार को भूटान के जेमगांग जिले में 770 मेगावाट की चमखरछू-I जलविद्युत परियोजना विकसित करने के लिए साझेदारी का ऐलान किया. यह दोनों कंपनियों के बीच दूसरी बड़ी पनबिजली साझेदारी है.

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अडानी पावर 770 MW प्रोजेक्ट के जरिए सर्दियों में भूटान को देगा बिजली

Adani Power: अडानी पावर और भूटान की सरकारी कंपनी ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन (DGPC) ने मंगलवार को भूटान के जेमगांग जिले में 770 मेगावाट की चमखरछू-I जलविद्युत परियोजना विकसित करने के लिए साझेदारी का ऐलान किया.

यह दोनों कंपनियों के बीच दूसरी बड़ी पनबिजली साझेदारी है. इससे पहले सितंबर 2025 में दोनों ने 570 मेगावाट की वांगछू जलविद्युत परियोजना के लिए समझौता किया था.

यह परियोजना मई 2025 में अडानी समूह और DGPC के बीच हुए 5,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजनाओं के विकास से जुड़े समझौता ज्ञापन का भी हिस्सा है.

समझौते पर हस्ताक्षर के कार्यक्रम में भूटान के प्रधानमंत्री ल्योनचेन दाशो त्शेरिंग तोबगे भी मौजूद रहे. उनके अलावा भूटान सरकार, ड्रुक होल्डिंग एंड इन्वेस्टमेंट्स, भूटान पावर कॉरपोरेशन, DGPC और अडानी पावर के वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए.

भूटान के साथ सहयोग को मजबूत करेगी साझेदारी

अडानी पावर के प्रबंध निदेशक अनिल सरदाना ने कहा कि यह साझेदारी भूटान के साथ सहयोग को और मजबूत करेगी और दक्षिण एशिया के ऊर्जा बदलाव में मदद करेगी. उन्होंने कहा कि यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता कम करने और साझा स्थिरता लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में योगदान देगी.

चमखरछू-I परियोजना भूटान की सर्दियों में बिजली की सबसे अधिक मांग को पूरा करने में मदद करेगी. वहीं, गर्मियों के महीनों में देश में पैदा होने वाली अतिरिक्त हरित बिजली को भारत को निर्यात किया जा सकेगा.

चमखरछू नदी पर बनेगी परियोजना

केंद्रीय भूटान के जेमगांग जिले में चमखरछू नदी पर बनने वाली इस परियोजना को बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (BOOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा. इसमें अडानी पावर और DGPC की हिस्सेदारी क्रमशः 49:51 प्रतिशत होगी. परियोजना के वाणिज्यिक संचालन शुरू होने की तारीख से 30 साल की रियायत अवधि होगी.

DGPC के प्रबंध निदेशक दाशो छेवांग रिनजिन ने कहा कि यह परियोजना भूटान की सर्दियों की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और अतिरिक्त स्वच्छ बिजली को भारत को निर्यात करने में सक्षम बनाएगी.

ऊर्जा क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य

770 मेगावाट की यह परियोजना भूटान की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय सहयोग को भी मजबूत करेगी. परियोजना का निर्माण 2027 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है और इसके छह साल बाद इसे चालू करने का लक्ष्य रखा गया है.

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यह परियोजना भारत और भूटान के बीच जलविद्युत क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने के साथ-साथ लंबे समय के लिए क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देगी.

-भारत एक्सप्रेस



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