युवराज सिंह, सचिन तेंदुलकर और गौतम गंभीर
भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं, जिन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से करोड़ों फैंस का दिल जीता. सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar), युवराज सिंह, गौतम गंभीर और जहीर खान भी ऐसे ही नाम हैं. लेकिन एक समय ऐसा आया, जब इन दिग्गज खिलाड़ियों को टीम इंडिया से बाहर होना पड़ा. अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की चयन समिति के पूर्व अध्यक्ष संदीप पाटिल ने इन फैसलों को लेकर खुलकर बात की है. उन्होंने बताया कि आखिर किन बातों को ध्यान में रखकर ऐसे बड़े फैसले लिए गए थे.
दिग्गज खिलाड़ियों को बाहर करने का फैसला क्यों हुआ?
संदीप पाटिल ने दूरदर्शन के शो ‘द ग्रेट इंडियन क्रिकेट शो’ में बातचीत के दौरान अपने कार्यकाल से जुड़े कई अहम पहलुओं पर चर्चा की. वह 2012 से 2016 तक भारतीय टीम की चयन समिति के अध्यक्ष रहे थे. इस दौरान टीम में कई बदलाव हुए और कुछ बड़े खिलाड़ियों के करियर को लेकर भी अहम फैसले लिए गए.
पाटिल ने कहा कि सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह, गौतम गंभीर और जहीर खान जैसे खिलाड़ियों को टीम से बाहर करने या उनके संन्यास से जुड़े फैसले लेना आसान नहीं था. इन खिलाड़ियों ने भारतीय क्रिकेट को काफी कुछ दिया था. ऐसे में उनके बारे में इस तरह के फैसले लेते समय भावनाएं जुड़ना स्वाभाविक था.
हालांकि, उन्होंने साफ किया कि ये फैसले किसी एक व्यक्ति ने नहीं लिए थे. पांच सदस्यीय चयन समिति ने भारतीय क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सामूहिक रूप से निर्णय लिए थे.
दोस्ती अपनी जगह, टीम का हित सबसे पहले
संदीप पाटिल ने यह भी माना कि खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत रिश्ते होना स्वाभाविक है. लंबे समय तक क्रिकेट से जुड़े रहने के दौरान दोस्ती और आपसी लगाव भी पैदा होता है. लेकिन चयनकर्ता की जिम्मेदारी संभालते समय इन रिश्तों को फैसलों पर हावी नहीं होने दिया जा सकता.
उन्होंने कहा कि आप किसी खिलाड़ी के दोस्त हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसे सिर्फ दोस्ती की वजह से टीम में जगह दे दी जाए. चयनकर्ता को एक सीमा तय करनी पड़ती है और टीम के हित को सबसे ऊपर रखना होता है.
कई बार लेने पड़ते हैं मुश्किल फैसले
पाटिल के मुताबिक, चयनकर्ता का काम सिर्फ खिलाड़ियों को चुनना नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखकर सही फैसले लेना भी है. कई बार ऐसे निर्णय करने पड़ते हैं, जिनसे खुद चयनकर्ता भी खुश नहीं होते. इसके बावजूद देश और टीम की बेहतरी के लिए उन्हें अपनी भावनाओं से ऊपर उठना पड़ता है.
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उन्होंने माना कि पुराने खिलाड़ियों के टीम से बाहर होने की बात पर आज भी दुख होता है. लेकिन चयनकर्ता के तौर पर उनकी प्राथमिकता भारतीय क्रिकेट, BCCI और देश की टीम का हित था. यही वजह थी कि व्यक्तिगत पसंद और रिश्तों के बजाय टीम के भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लिए गए.
-भारत एक्सप्रेस
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