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यासीन के चक्कर में जेल सुपरिटेंडेंट तलब, दिल्ली हाईकोर्ट ने तिहाड़ प्रशासन से मांगा जवाब

NIA Plea On Yasin Malik Case: टेरर फंडिंग के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट अलगाववादी नेता यासीन मलिक की सजा को लेकर सुनवाई हो रही थी. इसी जौरान अदालत ने जेल सुपरिटेंडेंट को फतकार लगाते हुए तलब कर लिया. जानिए आखिर कोर्ट में अचानक हुई क्या था?

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यासीन मलिक टेरर फंडिंग केस अपडेट

NIA Plea On Yasin Malik Case: कश्मीरी अलगाववादी नेता और आतंकी वित्तपोषण मामले में सजा काट रहे यासीन मलिक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने एनआईए (NIA) की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल प्रशासन से कड़ा जवाब तलब किया है, जिसमें मलिक को उम्रकैद की सजा को फांसी में बदलने की मांग की गई है. सुनवाई के दौरान यासीन मलिक के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश न होने पर अदालत ने नाराजगी जताई और जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है.

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस अरुण भारद्वाज की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यासीन मलिक आज तिहाड़ जेल से वर्चुअली अदालत में पेश (asin Malik virtual hearing missing) नहीं हुए. अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए तिहाड़ जेल सुपरिटेंडेंट को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि सुनवाई के वक्त मलिक की गैर-मौजूदगी की क्या वजह थी. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई अब दिसंबर के लिए तय की है.

क्या है NIA की अपील? (Yasin Malik death penalty NIA plea)

गौरतबल है कि इससे पहले निचली अदालत ने यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. लेकिन राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की है और मांग की है कि यासीन मलिक जैसे कट्टर अपराधी के अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे उम्रकैद की जगह मौत की सजा (फांसी) दी जानी चाहिए.

पाकिस्तान से फंडिंग का सच

एनआईए की जांच के मुताबिक, यासीन मलिक, लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद और हिजबुल मुजायुद्दीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन जैसे आतंकियों ने पाकिस्तान और अन्य विदेशी स्रोतों से भारी मात्रा में धन जुटाया था. इस फंड का इस्तेमाल मुख्य रूप से 2010 और 2016 के दौरान कश्मीर घाटी में भारत सरकार के खिलाफ हिंसा भड़काने, युवाओं को पैसे बांटकर सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी कराने और सार्वजनिक संपत्तियों को आग लगाने के लिए किया गया था.

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इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले ‘लाइन ऑफ कंट्रोल’ (LoC) व्यापार का दुरुपयोग भी आतंक फैलाने के लिए किए जाने के सुबूत मिले हैं. धनशोधन (Money Laundering) की जांच में लगभग 8.94 करोड़ रुपए की अवैध कमाई का खुलासा होने के बाद हाल ही में विशेष अदालत ने PMLA के तहत नए आरोप भी तय किए हैं.



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