US Book Ban
US Book Ban: अमेरिका को दुनिया भर में आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए जाना जाता है, लेकिन वहां के स्कूलों में किताबों पर प्रतिबंध का मामला चर्चा में है. PEN America की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 के शैक्षणिक सत्र में अमेरिकी स्कूलों में किताबों पर प्रतिबंध की घटनाएं बढ़कर 11,982 तक पहुंच गईं. रिपोर्ट में 7,370 अलग-अलग किताबों के प्रभावित होने का दावा किया गया है. इनमें 4,500 से अधिक किताबें ऐसी थीं, जिन्हें पहली बार प्रतिबंधित किए जाने की सूची में शामिल किया गया. इस घटनाक्रम ने स्कूल लाइब्रेरी में बच्चों की पढ़ने की आजादी और किताबों की उपलब्धता को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
किन किताबों पर लग रहा है प्रतिबंध?
PEN America की रिपोर्ट के अनुसार, नस्ल और रंगभेद, LGBTQ+ समुदाय, जेंडर आइडेंटिटी और यौन विषयों से जुड़ी सामग्री वाली किताबें प्रतिबंधों के निशाने पर रही हैं. प्रभावित किताबों में फिक्शन यानी काल्पनिक कहानियों की हिस्सेदारी करीब 87 फीसदी रही.
स्टीफन किंग से लेकर ‘जेन आयर’ तक किताबें सूची में
रिपोर्ट के मुताबिक, हॉरर लेखक स्टीफन किंग लगातार दूसरे साल सबसे ज्यादा निशाने पर रहे. उनकी किताबें 312 बार प्रतिबंधित की गईं. वहीं, पेट्रीसिया मैककॉर्मिक की किताब Sold सबसे ज्यादा बार प्रतिबंधित होने वाला एकल शीर्षक रही. इसमें मानव तस्करी का शिकार बनी एक किशोरी की कहानी है. Jane Eyre, The Handmaid’s Tale और Speak जैसी चर्चित किताबें भी प्रभावित हुई हैं.
टेक्सास और फ्लोरिडा में सबसे ज्यादा प्रतिबंध
रिपोर्ट में टेक्सास और फ्लोरिडा में सबसे अधिक प्रतिबंध दर्ज किए गए. टेक्सास में 8,100 से अधिक और फ्लोरिडा में 3,200 से ज्यादा प्रतिबंधों के मामले सामने आए. रिपोर्ट के अनुसार, नए राज्य कानूनों और स्कूलों पर सामग्री हटाने के दबाव ने इस संख्या में बढ़ोतरी में भूमिका निभाई.
अब किताबों की जांच में AI का इस्तेमाल
इस मामले का एक और अहम पहलू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल है. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ स्कूलों में किताबों की समीक्षा और उन्हें हटाने की प्रक्रिया में AI टूल का उपयोग किया गया. इससे बड़ी संख्या में किताबों को तेजी से प्रतिबंधित करने की आशंका बढ़ी है.
PEN America का कहना है कि स्कूल लाइब्रेरी में अलग-अलग अनुभवों और विचारों को जगह मिलनी चाहिए. वहीं, किताबों की उपयुक्तता को लेकर बहस में बच्चों की उम्र और शैक्षणिक जरूरतें भी अहम हैं. ऐसे में सवाल यह है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और पढ़ने की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.
भारत एक्सप्रेस
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