राहुल गांधी ने उठाया पिटाई का मुद्दा
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान NSUI कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट का मुद्दा अब राजनीतिक रूप से और गरमा गया है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रभावित छात्रों के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनकी बात देश के सामने रखी. राहुल गांधी ने कहा कि ये छात्र सिर्फ अपने संगठन की नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं की आवाज हैं.
राहुल गांधी की अपील
उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने साथ हुई हर घटना के वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखें. राहुल ने कहा कि किसी को भी युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. क्योंकि देश के छात्रों की ताकत के सामने कोई टिक नहीं सकता. उनका कहना था कि अन्याय करने वालों को भविष्य में जवाबदेह ठहराया जाएगा.
वो दिन आ रहा है जब हमारे लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने वालों को कठोर न्याय का सामना करना पड़ेगा। चाहे वो नरेंद्र मोदी हों, अमित शाह हों, ज्ञानेश कुमार हों या कोई भी हवलदार।
मैं चाहता हूँ कि हर वो छात्र और युवा, जिसने पुलिस की हिंसा या ग़ैरक़ानूनी हिरासत झेली है, उसका पूरा रिकॉर्ड रखे – वीडियो या फोटो – ये ज़रूरी होंगे।
शांतिपूर्ण विरोध आपका अधिकार है। हम इसे किसी को छीनने नहीं देंगे।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 14, 2026
समर्थ ने सुनाई हिरासत और मारपीट की कहानी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद NSUI कार्यकर्ता समर्थ ने दावा किया कि संगठन के सदस्य 4 अक्टूबर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे. उनके मुताबिक 5 अक्टूबर को पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और बाद में पार्लियामेंट पुलिस स्टेशन पहुंचाया गया.
समर्थ का आरोप है कि वहां वहाब सिंह तोमर नामक पुलिसकर्मी समेत करीब 20 पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बुरी तरह मारपीट की. उन्होंने कहा कि बाद में उन्हें पिछले रास्ते से बाहर निकाला गया और दिल्ली कैंट तक ले जाते समय कांस्टेबल अंकित कसाना लगातार उनकी पिटाई करता रहा.
समर्थ ने यह भी आरोप लगाया कि यात्रा के दौरान उनके साथी धर्मेंद्र की तबीयत खराब हो गई थी. जब धर्मेंद्र ने उल्टी आने की बात कही तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें बैग में ही उल्टी करने को कहा.
राहुल ने महिला प्रदर्शनकारी को बताया ‘शेरनी’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने एक महिला प्रदर्शनकारी का परिचय कराते हुए उन्हें ‘शेरनी’ कहा. राहुल के मुताबिक, कथित मारपीट और दबाव के बावजूद वह डरी नहीं और उनके मन में किसी के प्रति नफरत भी नहीं है.
राहुल ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी महिला प्रदर्शनकारी ने साहस और संयम का परिचय दिया जो अन्य युवाओं के लिए एक उदाहरण है.
महिला प्रदर्शनकारी ने लगाए गंभीर आरोप
महिला प्रदर्शनकारी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें और अन्य कार्यकर्ताओं को तीन बसों में बैठाकर हिरासत में लिया था. उनके अनुसार, जिस बस में वह मौजूद थीं उसमें दो लड़कियों के अलावा NSUI के लगभग 20 से 30 कार्यकर्ता भी थे. उन्होंने बताया कि बस में चंचल यादव नाम की एक महिला कांस्टेबल भी तैनात थीं.
महिला का कहना है कि हिरासत में लिए जाने के बाद कुछ कार्यकर्ताओं ने दोबारा प्रदर्शन करने की कोशिश की. विरोध जारी रखने के लिए कुछ लोगों ने बस से उतरकर उसे रोकने का प्रयास किया और उसके सामने बैठ गए.
उनका आरोप है कि इसी दौरान महिला कांस्टेबल चंचल यादव ने उनका गला पकड़कर खींचा और जोर से धक्का दिया, जिससे वह सीट पर गिर गईं. उन्होंने दावा किया कि इसके बाद उनके चेहरे और कान के पास नाखूनों से खरोंच मारी गई. महिला के अनुसार विरोध जताने पर कांस्टेबल ने उन्हें थप्पड़ मारते हुए कहा, “लो, एक और थप्पड़ खा लो.”
‘बुला लो अपने नेता को’
दूसरे NSUI कार्यकर्ता धर्मेंद्र कुमार ने भी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना था कि पुलिसकर्मियों ने उनसे कहा कि बोलो दिल्ली पुलिस तुम्हारे पापा हैं. धर्मेंद्र ने दावा किया कि उनके साथ भी मारपीट की गई.
उन्होंने आरोप लगाया कि अंकित कसाना नाम के एक पुलिसकर्मी ने उन्हें चुनौती देते हुए कहा कि अपने नेता को बुला लो, तुम्हें बचाने कोई नहीं आएगा. धर्मेंद्र ने साफ कहा कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं और अन्याय के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेंगे.
बांसुरी पर गूंजा ‘वैष्णव जन तो’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मौजूद प्रदर्शनकारियों में से एक व्यक्ति ने बांसुरी पर महात्मा गांधी का प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो’ बजाया. इस दौरान उन्होंने संदेश दिया कि नफरत का जवाब नफरत से नहीं बल्कि प्रेम और अहिंसा से दिया जाएगा.
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युवाओं की आवाज दबाना आसान नहीं- राहुल गांधी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिर में राहुल गांधी ने एक बार फिर छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि पीड़ित युवाओं की बातें ही असल में हिंदुस्तान की आवाज हैं. उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी सबूत संभालकर रखें.
राहुल ने कहा कि देश के युवाओं की सोच और आवाज एक है, उन्हें डराकर या दबाकर चुप नहीं कराया जा सकता. उनका मानना है कि लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी सबसे बड़ी ताकत है और उसे कमजोर करने की किसी भी कोशिश का विरोध होना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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