भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में राजधानी दिल्ली में ‘जंतर-मंतर वापस लाओ’ अभियान के तहत एक विशाल विरोध मार्च निकाला. इस प्रदर्शन के माध्यम से संगठन ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के नागरिकों के संवैधानिक अधिकार को बहाल करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग उठाई. पटेल चौक मेट्रो स्टेशन से जंतर-मंतर की ओर बढ़े इस मार्च को दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग थाने के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया और उदय भानु चिब सहित कई प्रमुख पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया.
शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का मूल स्तंभ: युवा कांग्रेस
भारतीय युवा कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है. संगठन ने कहा कि सत्ता, शासन, जवाबदेही और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज पर सवाल उठाने वाले नागरिकों के लिए लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के प्रतीक सार्वजनिक स्थलों को बंद नहीं किया जा सकता. युवा कांग्रेस ने हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा पार्टी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के साथ किए गए कथित दुर्व्यवहार व बल प्रयोग की तीखी निंदा की और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच कराने तथा दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की.
‘जंतर-मंतर जनता का है, संघर्ष जारी रहेगा’: उदय भानु चिब
हिरासत में लिए जाने के दौरान युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने केंद्र सरकार और पुलिस प्रशासन पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा:
“जंतर-मंतर इस देश की जनता का है. यह हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों, संवैधानिक स्वतंत्रताओं और अन्याय के खिलाफ उठने वाली सामूहिक आवाज का प्रतीक है. भारतीय युवा कांग्रेस जंतर-मंतर को एक ऐसे स्थल के रूप में बहाल कराने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी, जहां देश का हर नागरिक बिना किसी भय, धमकी या प्रशासनिक पाबंदी के अपनी बात रख सके.”
विरोध स्थल की सूची से जंतर-मंतर को हटाने पर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका
सड़क पर प्रदर्शन और हिरासत के बाद यह मामला अब कानूनी चौखट तक पहुंच गया है. उदय भानु चिब ने शाम को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करते हुए एक याचिका दाखिल की है. इस याचिका में दिल्ली पुलिस के उस फैसले को सीधे चुनौती दी गई है, जिसके तहत ऐतिहासिक जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थलों की आधिकारिक सूची से बाहर कर दिया गया है. याचिका में इस आदेश को रद्द करने और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति बहाल करने की मांग की गई है. मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट का आगामी रुख बेहद महत्वपूर्ण होगा.
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