अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा 2026:
International Kullu Dussehra: अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा आयोजन समिति के अध्यक्ष और विधायक सुन्दर सिंह ठाकुर ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा 21 अक्टूबर से 27 अक्टूबर 2026 तक मनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि सात दिनों तक चलने वाला यह प्रसिद्ध उत्सव हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में आयोजित होगा और इसमें देश-विदेश के कलाकारों एवं श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिलेगी.
उन्होंने जानकारी दी कि 21 अक्टूबर को राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता इस भव्य आयोजन का उद्घाटन करेंगे, जबकि समापन समारोह में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू मुख्य रूप से मौजूद रहेंगे.
ग्लोबल डांस शो होगा मुख्य आकर्षण
सुन्दर सिंह ठाकुर के मुताबिक, इस बार के आयोजन में ग्लोबल डांस कार्यक्रम सबसे खास रहने वाला है. इसमें दुनिया के अलग-अलग देशों की नृत्य परंपराएं और हिमाचल प्रदेश की लोक संस्कृति एक ही मंच पर दिखाई देंगी.
इसके अलावा आधुनिक तकनीक से सजे ड्रोन शो और लेजर शो भी दर्शकों को आकर्षित करेंगे. आयोजन समिति को उम्मीद है कि यह कार्यक्रम युवाओं और पर्यटकों के बीच विशेष लोकप्रियता हासिल करेगा.
कई देशों के कलाकार करेंगे प्रस्तुति
कुल्लू दशहरा के दौरान आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय नृत्य महोत्सव में विभिन्न देशों के कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे. इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे.
आयोजन समिति के अनुसार, थाईलैंड, मिस्र, उज्बेकिस्तान, रूस, कजाकिस्तान और अमेरिका समेत लगभग 12 देशों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है. वहीं कुल 24 देशों के शामिल होने की संभावना जताई गई है.
कई सांस्कृतिक संस्थान देंगे सहयोग
इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) सांस्कृतिक सहयोगी की भूमिका निभा रही है. इसके अलावा उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र और दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र भी कार्यक्रमों के आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान देंगे.
आयोजकों का मानना है कि इन संस्थाओं के सहयोग से कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी.
17वीं शताब्दी से जुड़ी है परंपरा
सुन्दर सिंह ठाकुर ने कुल्लू दशहरा के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि इस उत्सव की परंपरा 17वीं शताब्दी से चली आ रही है और यह केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान भी है.
उन्होंने कहा कि कुल्लू को देवी-देवताओं की भूमि माना जाता है, इसलिए इसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है. इसी परंपरा के तहत इस वर्ष अब तक 346 स्थानीय देवी-देवताओं को आयोजन में शामिल होने का निमंत्रण भेजा जा चुका है.
भव्य आयोजन के लिए विशेष तैयारी
विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस उत्सव को और अधिक भव्य स्वरूप में आयोजित करने के निर्देश दिए हैं. इसी के चलते कार्यक्रमों की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ आयोजन के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि दशहरा उत्सव पहले की तरह सात दिनों तक चलेगा और इसमें विभिन्न सरकारी विभागों तथा संस्थाओं की ओर से प्रदर्शनियां और स्टॉल लगाए जाएंगे.
खेल और नशा मुक्ति अभियान भी होंगे शामिल
धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के अलावा इस बार स्थानीय खेल प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा. साथ ही युवाओं को जागरूक करने के लिए नशा मुक्ति अभियान को भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है.
आयोजन समिति का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने का काम करेंगे.
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
नई दिल्ली में आयोजित प्रीव्यू कार्यक्रम का उद्देश्य देशभर के लोगों को कुल्लू दशहरा के बारे में जानकारी देना और अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करना है.
सुन्दर सिंह ठाकुर ने कहा कि यह उत्सव हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है. यहां आने वाले पर्यटक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने के साथ-साथ स्थानीय हस्तशिल्प, ऊनी वस्त्रों और क्षेत्र के पारंपरिक उत्पादों की खरीदारी भी कर सकते हैं.
देशभर के लोगों को दिया निमंत्रण
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे कुल्लू पहुंचकर इस ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के उत्सव का हिस्सा बनें और देवभूमि हिमाचल की अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से देखें.
इस अवसर पर प्रधान आवासीय आयुक्त अजय यादव और उप-आवासीय आयुक्त मयंक शर्मा भी मौजूद रहे. आयोजन समिति ने उम्मीद जताई कि इस वर्ष का कुल्लू दशहरा पहले की तुलना में और अधिक भव्य, आकर्षक और यादगार साबित होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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