Pakistan School Tragedy- bharat express
Pakistan School Tragedy: पाकिस्तान से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है. पेशावर की दिर कॉलोनी में एक निजी स्कूल की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया. जिसमें 20 छात्रों और एक महिला टीचर समेत कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई. इस घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. हादसे में कई छात्र घायल भी हुए हैं. जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया. घटना की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल में इमरजेंसी घोषित कर दी गई. इस हादसे ने एक बार फिर पाकिस्तान में स्कूलों की इमारतों की सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पेशावर में कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक. गुरुवार. 15 अक्टूबर को पेशावर की दिर कॉलोनी स्थित एक निजी स्कूल की छत अचानक गिर गई. हादसे के समय स्कूल में छात्र और शिक्षक मौजूद थे. छत गिरने से कई लोग मलबे में दब गए.
लेडी रीडिंग हॉस्पिटल के प्रवक्ता मुहम्मद आसिम ने घटना में 21 लोगों की मौत की पुष्टि की. इससे पहले उन्होंने बताया था कि 17 छात्रों की मौत हुई है और सभी की उम्र 13 साल या उससे कम थी. हादसे में घायल 17 अन्य छात्रों को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया. घटनास्थल पर बचाव अभियान चलाया गया. ताकि मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला जा सके.
पाकिस्तान में पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
पाकिस्तान में इमारतों और स्कूलों के ढहने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं. इन हादसों के पीछे कमजोर निर्माण. सुरक्षा मानकों की अनदेखी और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल जैसी समस्याओं को जिम्मेदार बताया जाता है. डॉन की रिपोर्ट के अनुसार. जुलाई में उमरकोट के पास एक सरकारी प्राथमिक स्कूल की बाहरी दीवार गिरने से तीन लड़कियों की मौत हो गई थी. उसी महीने लाहौर के बागबानपुरा इलाके में निर्माणाधीन निजी स्कूल की छत गिरने से एक बच्चे की जान चली गई. जबकि कम से कम पांच लोग घायल हुए थे.
ट्यूशन सेंटर की छत गिरने से गई थी 14 बच्चों की जान
इससे पहले जून में लाहौर के काहना इलाके में एक निजी ट्यूशन सेंटर की छत गिरने से 14 बच्चों की मौत हो गई थी. वहीं. डेरा गाजी खान में एक निजी स्कूल की कक्षा की छत गिरने से चार बच्चों की जान चली गई थी और 20 लोग घायल हुए थे. जांच में सामने आया था कि डेरा गाजी खान की इमारत में विस्तार का काम चल रहा था. तभी कक्षा की छत गिर गई.
स्कूलों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
पेशावर का यह हादसा बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है. लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं बताती हैं कि स्कूलों की इमारतों की मजबूती. नियमित निरीक्षण और निर्माण मानकों का पालन बेहद जरूरी है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक कमजोर इमारतों की कीमत मासूम बच्चों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी?
भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.






