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पहाड़ों की गोद में बसा ऋषि महादेव मंदिर: हरियाली, झरने और शिवभक्ति के अनूठे संगम की मनमोहक तस्वीरें

राजस्थान के प्रतापगढ़ में स्थित प्राचीन ऋषि महादेव मंदिर प्राकृतिक सुंदरता और अटूट आस्था का केंद्र है. पहाड़ियों और झरनों के बीच बसे इस शिवधाम को अब पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने का इंतजार है.

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Rishi Mahadev Mandir: पहाड़ों से बहती जलधाराएं, चारों ओर फैली हरियाली की चादर और प्रकृति के बीच विराजे भगवान शिव… यह खूबसूरत नजारा राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के अरनोद क्षेत्र में स्थित प्राचीन ऋषि महादेव मंदिर का है. जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित यह धाम सदियों से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र रहा है.

सावन और मानसून के दिनों में यहां की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यह प्राचीन धाम आज भी आधिकारिक पहचान और विकास की राह देख रहा है. देखिए इस प्राकृतिक शिवधाम की खास फोटो स्टोरी:

अरनोद क्षेत्र के लोहारखाली में स्थित ऋषि महादेव मंदिर चारों तरफ पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा हुआ है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति के साथ अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव होता है. यह स्थान पीढ़ियों से स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

मानसून के मौसम में पहाड़ों से पानी की धाराएं बहने लगती हैं और मंदिर परिसर के पास स्थित कुंड पानी से भर जाता है. चट्टानों के बीच से गुजरते झरने और कुंड में बनती भंवर जैसी जलधाराएं पर्यटकों को खूब आकर्षित करती हैं. बारिश में यह धाम प्रकृति प्रेमियों के लिए खास बन जाता है.

मंदिर परिसर की सफाई के दौरान पुराने पत्थरों के बीच से प्राचीन शिवलिंग प्रकट हुए थे, जिन्हें ग्रामीण अत्यधिक पवित्र मानते हैं. इसके अलावा मंदिर परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों के स्वरूप भी स्थापित किए गए हैं. श्रद्धालु यहां आकर भगवान शिव का जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं.

हर साल महाशिवरात्रि के मौके पर यहां तीन दिवसीय भव्य यज्ञ और पारंपरिक मेले का आयोजन होता है. इस दौरान आसपास की पंचायतों और राजस्थान के साथ-साथ मध्य प्रदेश के उज्जैन, रतलाम और सैलाना से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. पूरा इलाका शिवभक्ति में सराबोर नजर आता है.

सावन के पवित्र महीने में ऋषि महादेव मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रहती है. रामायण, गीता और शिव पुराण कथाओं के जरिए धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है. प्रसिद्ध गौतमेश्वर महादेव तीर्थ से जुड़े इस क्षेत्र में श्रद्धालुओं का सालभर आना-जाना लगा रहता है.

अपार प्राकृतिक सौंदर्य के बावजूद यह धाम पक्की सड़क, शौचालय और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की राह जोह रहा है. ग्रामीणों की मांग है कि इसे आधिकारिक धार्मिक पर्यटन स्थल घोषित किया जाए. सड़क निर्माण और मूलभूत सुविधाएं मिलने से यहां पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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