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विशाखापत्तनम में अदाणी का ‘मेगा प्लान’, पर्यावरण प्रेमियों के हंगामे के बाद बदली पूरी रणनीति

Adani Group News: विशाखापत्तनम में अदाणीकॉनेक्स और गूगल के प्रस्तावित AI डेटा सेंटर को लेकर उठे पानी के विवाद के बीच नया अपडेट आया है. कंपनी पारंपरिक वाटर-कूलिंग की जगह एयर-कूलिंग तकनीक अपनाएगी ताकि स्थानीय जलाशयों पर दबाव न पड़े.

विशाखापत्तनम में अदाणीकॉनेक्स और गूगल के प्रस्तावित AI डेटा सेंटर में पानी की खपत घटाने के लिए एयर-कूलिंग तकनीक का इस्तेमाल होगा. जानिए विवाद की पूरी वजह.

Adani Group News: आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में अदाणीकॉनेक्स और गूगल की साझेदारी में बनने वाले लगभग 1 गीगावाट क्षमता वाले AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को लेकर विवाद गहरा गया है. डेटा सेंटर की वजह से स्थानीय जलाशयों और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कंपनी ने पानी बचाने के लिए नई तकनीक अपनाने का दावा किया है.

क्लाउड कंप्यूटिंग और AI की बढ़ती मांग के बीच आंध्र प्रदेश में रिलायंस और एयरटेल जैसी कंपनियां भी बड़ा निवेश कर रही हैं. हालांकि, अदाणी और गूगल द्वारा उन्नत एयर-कूलिंग तकनीक अपनाने का निर्णय यह दर्शाता है कि डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी हो गया है.

एयर-कूलिंग तकनीक से बचेगा शहर का पानी

डेटा सेंटर के भारी-भरकम सर्वरों को ठंडा रखने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली पानी-आधारित वाष्पीकरण प्रणाली (Evaporative Cooling) की जगह अब हवा-आधारित शीतलन प्रणाली (Air-Cooling Technology) का इस्तेमाल किया जाएगा. कंपनी का दावा है कि इस बदलाव से परियोजना के तीनों स्थलों पर ताजे पानी की कुल खपत एक ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल से भी कम रह जाएगी.

स्थानीय पेयजल आपूर्ति पर नहीं पड़ेगा असर

परियोजना से जुड़े सूत्रों के अनुसार, परिसरों में जरूरत के सीमित ताजे पानी का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा बागवानी, रसोई और कर्मचारियों की सुविधाओं के लिए इस्तेमाल होगा. इसके अलावा, घरेलू पेयजल आपूर्ति पर दबाव न पड़े, इसके लिए नगर निगम की जगह अलग औद्योगिक जलापूर्ति कनेक्शन लिए जाएंगे. परिसर से निकलने वाले अपशिष्ट जल का 100% उपचार (Zero-Discharge Policy) कर उसे रीसायकल किया जाएगा और पास के मुदासरलोवा जलाशय में नहीं छोड़ा जाएगा.

मुदासरलोवा जलाशय और वन्यजीव अभयारण्य पर था खतरा

विशाखापत्तनम में मुदासरलोवा जलाशय शहर का प्रमुख पेयजल स्रोत है, जिसके पास ही कंबालकोंडा वन्यजीव अभयारण्य स्थित है. पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई थी कि बड़े पैमाने पर पानी खींचने से जलाशय सूख सकता है और वन्यजीवों पर बुरा असर पड़ेगा. राज्य सरकार के मुताबिक, 6.5 गीगावाट तक विस्तार होने पर सालाना 3 टीएमसी पानी की जरूरत पड़ सकती थी, जिसके बाद ही विवाद ने तूल पकड़ा.

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-भारत एक्सप्रेस



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