फ्रांस में बेकाबू हुआ विरोध
France Protests: फ्रांस में पिछले एक महीने से चल रहा विरोध प्रदर्शन अब सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. शुरुआत में यह आंदोलन स्कूलों में शिक्षकों और संसाधनों की कमी को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे इसमें महंगाई, वेतन, पेंशन और सरकारी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी शामिल हो गए. हालात ऐसे हो चुके हैं कि देश के कई हिस्सों में हिंसा, आगजनी और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आ रही हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 8 लाख से अधिक लोग इस आंदोलन का हिस्सा बन चुके हैं, जबकि 6 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसके बावजूद लोगों का गुस्सा कम होता नहीं दिख रहा.
प्रदर्शनकारियों का राष्ट्रपति भवन तक मार्च
फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन कई शहरों में काफी उग्र हो गया है. कुछ प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन के काफी नजदीक तक पहुंच गए. वहीं लिमोज शहर में 143 साल पुरानी एक ऐतिहासिक इमारत को आग के हवाले कर दिया गया. कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव देखने को मिला. कुछ लोगों ने विरोध जताने के लिए ऐतिहासिक मूर्तियों पर चढ़कर प्रदर्शन किया. इसके अलावा लिली और मार्सिले जैसे शहरों में सरकारी इमारतों में घुसने की घटनाओं की भी खबरें सामने आई हैं.
केवल शिक्षा नहीं, अब कई मुद्दों पर नाराजगी
आंदोलन में शामिल लोगों की मांगें लगातार बढ़ती गई हैं. शुरुआत में छात्र और शिक्षक शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात कर रहे थे, लेकिन अब प्रदर्शनकारी महंगाई कम करने, वेतन और पेंशन बढ़ाने तथा सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने की मांग भी कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है और सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने चाहिए.
शिक्षकों की कमी छात्रों की सबसे बड़ी परेशानी
छात्रों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि कई स्कूलों में लंबे समय से शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं. हालात ऐसे हैं कि जब कोई शिक्षक लंबे समय तक अनुपस्थित रहता है तो उसकी जगह दूसरा शिक्षक उपलब्ध नहीं कराया जाता. इससे पढ़ाई प्रभावित होती है और कई बार जरूरी विषयों की कक्षाएं तक रद्द करनी पड़ती हैं. छात्रों का कहना है कि यह स्थिति उनके भविष्य पर असर डाल रही है.
स्कूलों में सुविधाओं की कमी को लेकर भी नाराजगी
शिक्षकों की कमी के अलावा छात्रों ने स्कूलों में कई बुनियादी समस्याओं का मुद्दा भी उठाया है. उनका कहना है कि कई स्कूलों में कक्षाएं जरूरत से ज्यादा भरी हुई हैं. पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. गर्मी के दौरान हालात और खराब हो जाते हैं. कई इमारतें जर्जर अवस्था में हैं और लंबे समय तक पढ़ाई करनी पड़ती है. कुछ संस्थानों में छात्रों को सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक स्कूल में रहना पड़ता है, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है.
कैसे शुरू हुआ यह बड़ा आंदोलन?
इस आंदोलन की शुरुआत 17 सितंबर को पेरिस के पास स्थित क्रेतै के एंटोनी डी सेंट-एक्जुपेरी हाईस्कूल से हुई थी. वहां शिक्षक स्टाफ की कमी और संसाधनों के अभाव को लेकर हड़ताल कर रहे थे. छात्रों ने भी शिक्षकों के समर्थन में प्रदर्शन शुरू कर दिया. 29 सितंबर को प्रशासन ने अतिरिक्त स्टाफ, एक डिप्टी प्रिंसिपल और नर्स की व्यवस्था करने पर सहमति जताई, जिसके बाद वहां की हड़ताल समाप्त हो गई. हालांकि तब तक यह आंदोलन दूसरे इलाकों में फैल चुका था.
सिर्फ 8 दिनों में 410 स्कूलों तक पहुंचा विरोध
शुरुआत एक स्कूल से हुई थी, लेकिन कुछ ही दिनों में विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया. महज 8 दिनों के भीतर आंदोलन 410 स्कूलों तक पहुंच गया. बाद में विश्वविद्यालयों के छात्रों ने भी इसमें भाग लेना शुरू कर दिया. देखते ही देखते छात्रों को शिक्षकों, अभिभावकों और विभिन्न मजदूर संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा, जिससे आंदोलन का दायरा और बड़ा होता गया.
एक घटना ने और भड़काया लोगों का गुस्सा
5 अक्टूबर को उत्तरी फ्रांस के लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान एक गंभीर घटना हुई. आरोप है कि पुलिस के एक ग्रेनेड से 15 साल का एक लड़का बुरी तरह घायल हो गया. चोट इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों को उसका हाथ काटना पड़ा. इस घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर लोगों में भारी नाराजगी फैल गई और विरोध प्रदर्शन को नई ताकत मिल गई.
सैकड़ों लोग हुए घायल
आंदोलन के दौरान हुई झड़पों का असर दोनों पक्षों पर पड़ा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक 200 से ज्यादा छात्र घायल हो चुके हैं. इसके अलावा स्कूलों के 85 कर्मचारी भी चोटिल हुए हैं. दूसरी तरफ कानून व्यवस्था संभाल रहे 700 से अधिक पुलिसकर्मी भी इस दौरान घायल हुए हैं. लगातार बढ़ती हिंसा ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है.
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आखिर क्यों नहीं रुक रहा आंदोलन?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विरोध के लंबे समय तक जारी रहने के पीछे कई कारण हैं. पहला, लोगों को लगता है कि महंगाई उनकी आय से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है. दूसरा, शिक्षा व्यवस्था की समस्याएं अभी भी पूरी तरह दूर नहीं हुई हैं. तीसरा, लेंस में छात्र के घायल होने की घटना ने पुलिस के खिलाफ नाराजगी को और गहरा कर दिया. चौथा, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने कुछ आश्वासन तो दिए हैं, लेकिन उनकी सभी प्रमुख मांगों पर अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है. यही वजह है कि स्कूलों में स्टाफ और संसाधनों की कमी से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे फ्रांस में फैले बड़े जनआक्रोश का रूप ले चुका है.
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-भारत एक्सप्रेस
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