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Asian Para Games: तीसरे दिन भारत का जलवा, प्रवीण कुमार ने नया रिकॉर्ड बनाकर जीता गोल्ड; बंटी को मिला सिल्वर

एशियन पैरा गेम्स के तीसरे दिन भारतीय एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई मेडल अपने नाम किए. प्रवीण कुमार ने गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता, जबकि बंटी ने सिल्वर मेडल हासिल किया.

Asian Para Games

तीसरे दिन भारत का जलवा

Asian Para Games: खेल के मैदान से भारत के लिए एक बार फिर गर्व करने वाली खबर सामने आई है. एशियन पैरा गेम्स का आज तीसरा दिन है और भारतीय खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. बुधवार का दिन भारत के लिए पदकों की झड़ी लेकर आया, जहां पैरा एथलेटिक्स में हमारे खिलाड़ियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती.

प्रवीण कुमार का गोल्ड और बंटी का सिल्वर

दिन का सबसे बड़ा रोमांच पैरा एथलेटिक्स के मेंस हाई जंप (T64 कैटेगरी) इवेंट में देखने को मिला. भारत के स्टार पैरा एथलीट प्रवीण कुमार ने कमाल करते हुए न सिर्फ गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया, बल्कि नया गेम्स रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया. प्रवीण ने 2.05 मीटर की शानदार छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया.

इसी इवेंट में भारत के दूसरे खिलाड़ी बंटी ने भी गजब का खेल दिखाया. बंटी ने अपना पर्सनल बेस्ट प्रदर्शन देते हुए 1.92 मीटर की छलांग लगाई और सिल्वर मेडल अपने गले में सजाया. एक ही इवेंट में भारत के दो-दो खिलाड़ियों का पोडियम पर कब्जा देखना वाकई किसी जश्न से कम नहीं था.

आयुष शर्मा ने शॉट पुट में पहली स्वर्ण सफलता

आज के दिन की शुरुआत ही देश के लिए बेहद सुनहरी रही. मेंस शॉट पुट (F53 इवेंट) में आयुष शर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत की झोली में पहला स्वर्ण पदक डाला. आयुष ने अपने पांचवें प्रयास में 8.16 मीटर दूर गोला फेंककर पहला स्थान पक्का किया. उनके पीछे ईरान के अलीरेजा हेमामी 8.09 मीटर के साथ दूसरे और कजाखस्तान के मखाम्बेट सेरिक्कालियेव तीसरे स्थान पर रहे.

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कौन हैं स्टार एथलीट प्रवीण कुमार?

गोल्ड जीतने वाले प्रवीण कुमार की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणा है. उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के गोविंदगढ़ गांव से ताल्लुक रखने वाले प्रवीण जन्म से ही शारीरिक रूप से अक्षम थे, लेकिन उनके सपने हमेशा बहुत ऊंचे थे. कम उम्र में ही उन्हें एथलेटिक्स से प्यार हो गया और उन्होंने हाई जंप को अपना हथियार बनाया. कोच डॉ. सत्यपाल सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर आज दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर दिया है.



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