महाराष्ट्र में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को पैसे का लालच देकर अंडाणु (Oocyte/Egg) दान कराने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए उन्हें आईवीएफ सेंटरों तक पहुंचाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने 16 अक्टूबर 2026 को ठाणे, बारामती और नासिक में अस्पतालों एवं आईवीएफ सेंटरों समेत कुल 10 ठिकानों पर छापेमारी की है. जांच एजेंसी के मुताबिक, यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसके जरिए कमजोर वर्ग की महिलाओं को निशाना बनाया जाता था.
रैकेट का पूरा खेल और एजेंटों की भूमिका
जांच में सामने आया है कि संगठित नेटवर्क के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को अंडाणु दान के लिए तैयार किया जाता था. इसके बाद इन महिलाओं के अंडाणु विभिन्न आईवीएफ सेंटरों और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) बैंकों तक पहुंचाए जाते थे. इस पूरे नेटवर्क में डोनर उपलब्ध कराने वाले एजेंटों की मुख्य भूमिका थी, जो अलग-अलग प्रोप्राइटरशिप फर्मों के जरिए काम कर रहे थे.
महिलाओं को अंडाणु दान के बदले पैसे दिए जाते थे, जिसका भुगतान आईवीएफ सेंटरों और एआरटी बैंकों की ओर से एजेंटों के माध्यम से किया जाता था. इस प्रक्रिया में एजेंटों को भारी कमीशन मिलता था.
फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल
कथित रैकेट में महिलाओं की असली पहचान छिपाने और निर्धारित नियमों को ताक पर रखकर बार-बार अंडाणु दान कराने के लिए फर्जी दस्तावेजों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता था. इसमें पहचान पत्र, ब्लड टेस्ट रिपोर्ट और बीमा से जुड़े कागजात शामिल थे. इन दस्तावेजों के जरिए न सिर्फ महिलाओं की पहचान छिपाई जाती थी, बल्कि उनकी मेडिकल फिटनेस को लेकर भी गलत जानकारियां दी जाती थीं.
आरोप है कि महिलाओं को महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के विभिन्न संस्थानों में अंडाणु निकालने की दर्दनाक और जोखिम भरी प्रक्रिया से गुजरने के लिए भेजा जाता था. इस तरह चिकित्सकीय सुरक्षा नियमों को पूरी तरह दरकिनार किया जा रहा था. बार-बार अंडाणु निकालने की इस प्रक्रिया से महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर और दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ने का जोखिम था.
बदलापुर पुलिस थाने की एफआईआर
इस पूरे मामले की शुरुआत महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बदलापुर पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर और उसके बाद दाखिल चार्जशीट के आधार पर हुई थी. पुलिस में दर्ज शिकायत में मंजूषा वानखेड़े और 16 अन्य लोगों पर धोखाधड़ी, जालसाजी तथा अन्य गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं.
ये भी पढ़ें: ‘तिरंगे के लिए अड़ा रहा बेटा’, रेहान वाड्रा की एग्जिबिशन पर बवाल, क्या बोले रॉबर्ट और प्रियंका वाड्रा?
छापेमारी के दौरान ईडी ने कड़े कदम उठाते हुए 29 लाख रुपये नकद बरामद कर जब्त किए गए हैं. इसके अलावा, संदिग्ध बैंक खातों, बैंक लॉकरों और म्यूचुअल फंड में किए गए अवैध निवेश को फ्रीज कर दिया गया है. जांच एजेंसी के हाथ कई ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे हैं, जो इस अवैध रैकेट की परतें उधेड़ने में अहम सबूत साबित हो सकते हैं.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





