दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने ड्रग्स तस्करी के मामले में गिरफ्तार बानीत सिंह तलवार को 5 दिन के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिमांड पर भेज दिया है. ईडी ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया था. यह पूरा मामला सेमी-प्रोसेस्ड टैल्क में छिपाकर नशीले पदार्थों की बड़े पैमाने पर तस्करी और दिल्ली, पंजाब व हरियाणा से जुड़े ड्रग्स जब्ती मामलों से संबंधित है.
मुख्य आरोपी का भाई है बानीत
गिरफ्तार बानीत सिंह तलवार इस मामले के मुख्य आरोपी और दिल्ली के नाइट क्लब कारोबारी हरप्रीत सिंह तलवार उर्फ कबीर तलवार का भाई है. जांच एजेंसी के मुताबिक, कबीर तलवार की गिरफ्तारी के बाद भी बानीत ही उनके इस अवैध नेटवर्क और व्यापारिक संस्थाओं का संचालन कर रहा था.
एनआईए की एफआईआर पर आधारित जांच
ईडी की यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) द्वारा दर्ज की गई उस एफआईआर पर आधारित है, जिसमें हरप्रीत सिंह तलवार और अन्य आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), एनडीपीएस (NDPS) एक्ट और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए थे. एनआईए इस मामले में अब तक 6 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है.
अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट और आतंकी फंडिंग
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस मामले के कई आरोपी अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी सिंडिकेट के साथ मिलकर काम कर रहे थे. इस नेटवर्क का कथित सरगना विटायेश कोसर उर्फ राजू दुबई बताया गया है, जो इस मामले में वांछित आरोपी है. जांच में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के एजेंटों और अफगान नागरिकों से जुड़े नेटवर्क की भूमिका भी सामने आई है.
76 करोड़ रुपये की अवैध कमाई और हवाला
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री से कथित तौर पर करीब 76 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम अर्जित की गई. एजेंसी के मुताबिक, इस अवैध रकम को हवाला के जरिए अफगानिस्तान भेजा गया और इसका इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग के लिए किया गया.
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बानीत सिंह तलवार की भूमिका
एजेंसी के अनुसार, बानीत सिंह तलवार ने ‘मैजेंट इंडिया’ नामक कंपनी को 55 लाख रुपये से अधिक की रकम उपलब्ध कराई थी. यह कंपनी हरप्रीत सिंह तलवार के नियंत्रण में थी और कथित तौर पर ड्रग्स तस्करी से जुड़ी थी. इसके अलावा, बानीत पर नकद जमा करके बेनामी संस्थाओं के नाम पर वाहन खरीदने के लिए पैसे मुहैया कराने का भी आरोप है, जिन्हें ईडी पहले ही जब्त कर चुकी है.
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