पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषित साझा
PM Modi Subhashit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें जीवन की चुनौतियों और सफलता के बीच गहरा संबंध बताया गया है. इस श्लोक का संदेश साफ है कि बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के लिए मुश्किलों से घबराने के बजाय उनका सामना करना जरूरी है. जो व्यक्ति हिम्मत और समझदारी के साथ आगे बढ़ता है, वही अपने लक्ष्य तक पहुंच पाता है.
क्या है संस्कृत श्लोक का संदेश?
पीएम मोदी ने जो संस्कृत श्लोक साझा किया, वह है-
“न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति.
संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥”
न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति।
संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥ https://t.co/nc2isxM6oc
— Narendra Modi (@narendramodi) October 27, 2026
इसका भावार्थ है कि मनुष्य बिना जोखिम उठाए जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल नहीं कर सकता. जब कोई व्यक्ति अनिश्चितता और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस दिखाता है, तभी उसके सामने आगे बढ़ने के नए रास्ते खुलते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बिना सोचे-समझे कोई भी कदम उठा लिया जाए. जरूरी है कि जोखिम का सामना विवेक और सावधानी के साथ किया जाए.
महाभारत से जुड़ा है यह सुभाषित
यह संस्कृत श्लोक महाभारत के शांतिपर्व के 138वें अध्याय के 34वें श्लोक से जुड़ा बताया जाता है. इसमें जीवन की एक अहम सीख दी गई है कि केवल सुरक्षित रास्ता चुनते रहने से हर बड़ा लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता. कई बार आगे बढ़ने के लिए अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है और मुश्किल फैसले लेने पड़ते हैं.
आम जिंदगी में भी इसका उदाहरण देखने को मिलता है. चाहे नौकरी में नई जिम्मेदारी लेना हो, कारोबार शुरू करना हो या किसी बड़े लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करनी हो, हर कदम पर चुनौतियां सामने आती हैं. ऐसे में डर के कारण पीछे हटने के बजाय सही योजना बनाकर आगे बढ़ना ज्यादा जरूरी होता है.
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साहस के साथ सावधानी भी जरूरी
प्रधानमंत्री की ओर से साझा किए गए इस सुभाषित का संदेश है कि सफलता पाने के लिए साहस, धैर्य और आत्मविश्वास की अहम भूमिका होती है. मुश्किलें आने पर हार मान लेना आसान है, लेकिन उनका सामना करते हुए आगे बढ़ना ही व्यक्ति को अपने लक्ष्य के करीब ले जाता है.
साथ ही, जोखिम उठाने और लापरवाही करने के बीच का अंतर समझना भी जरूरी है. सोच-विचार कर उठाया गया कदम बेहतर नतीजों की संभावना बढ़ाता है. यही इस श्लोक की सीख है कि चुनौतियों से बचने के बजाय उनका समझदारी से सामना करें और अपने लक्ष्य की दिशा में लगातार आगे बढ़ते रहें.
-भारत एक्सप्रेस
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