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दिल्ली हाई कोर्ट ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

दिल्ली हाई कोर्ट ने आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली लालू प्रसाद यादव की याचिका पर ईडी से जवाब मांगा है.

lalu prasad yadav

लालू प्रसाद यादव

दिल्ली हाई कोर्ट ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. लालू प्रसाद यादव ने आईआरसीटीसी से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में निचली अदालत द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने के फैसले को चुनौती दी है.

जस्टिस सचिन दत्ता की कोर्ट ने ईडी को यह नोटिस जारी किया है. कोर्ट 3 दिसंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा. साथ ही हाई कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की मांग पर निचली अदालत में चल रही सुनवाई को 3.दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है. निचली अदालत ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, सरला गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स और सुजाता होटल्स सहित अन्य के खिलाफ आरोप तय कर दिया था.

वही कोर्ट ने 7 लोगों को बरी कर दिया है. कोर्ट ने जिन लोगो को बरी किया था, जिनलोगों को कोर्ट ने बरी किया था, उनमें गौरव गुप्ता, नथमल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, राजीव कुमार रेलन और अभिषेक फाइनेंस शामिल है. यह मामला आईआरसीटीसी के दो होटलों के रखरखाव और संचालन का ठेका एक निजी कंपनी को दिए जाने से जुड़ा है. आरोप है कि इस प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं हुई और उसके बदले में जमीन का लेन-देन किया गया. कोर्ट ने माना ऐसा नहीं लगता है कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ जांच राजनीति से प्रभावित थी.

कोर्ट ने कहा लारा प्रोजेक्ट को जिस तरह फायदा पहुचा वह लालू प्रसाद यादव की भूमिका पर संदेह पैदा करता है. कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया इस बात का मजबूत संदेह मौजूद है कि अपराध से अर्जित आय परिवार के सदस्यों के नाम पर पैदा की गई और उसका लाभ उठाया जा रहा है.

 लारा प्रोजेक्ट को कथित लाभ पहुंचाने पर अदालत ने उठाए सवाल

अदालत ने लारा प्रोजेक्ट को कथित तौर पर मिले लाभ के तरीके पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा था लारा प्रोजेक्ट को जिस तरह का फायदा पहुचाया गया, उससे लालू प्रसाद यादव की भूमिका को लेकर संदेह पैदा होता है. कोर्ट के फैसले के मुताबिक लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते उनके नेतृत्व में रेलवे अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर हेरफेर किया. ईडी ने लालू प्रसाद यादव परिवार के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी.

दाखिल चार्जशीट में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव को मुख्य रूप से नामजद आरोपी बनाया था. इनके अलावा कुछ अन्य लोगों और कंपनियों के खिलाफ भी ईडी ने चार्जशीट दायर किया है.

अदालत ने पहले की सुनवाई में यह भी माना था कि कथित टेंडर घोटाले की साजिश लालू प्रसाद यादव की जानकारी में रची गई थी. बता दें कि IRCTC का मामला लैंड फॉर जॉब मामले से अलग है. IRCTC घोटाला भी 2004 में लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुआ था. दरअसल रेलवे बोर्ड ने उस वक्त रेलवे की कैटरिंग और रेलवे होटलों की सेवा को पूरी तरह IRCTC को सौप दिया था.

इस दौरान रांची और पूरी के बीएनआर होटल के रखरखाव, संचालन और विकास को लेकर जारी टेंडर में अनियमितताएं किए जाने की बात सामने आई थी. इस मामले में ईडी ने 2017 में चार्जशीट दाखिल किया था.

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