राजनीतिक परामर्श फर्म ‘आई-पैक’ (I-PAC) से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग और तलाशी विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है. जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने दोनों पक्षों की लंबी जिरह सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. इस मामले में पश्चिम बंगाल की तरफ से और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने याचिकाएं दाखिल की थीं, जिस पर अदालत का यह बड़ा कदम सामने आया है.
कोर्ट में क्या बोले कपिल सिब्बल और सुप्रीम कोर्ट?
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने दलील दी. उन्होंने कहा कि अब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हालात और सरकार बदल चुकी है. ऐसी स्थिति में राज्य सरकार के पास खुद यह अधिकार है कि वह मामले की जांच सीबीआई को सौंप सके, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इसमें दखल देने की कोई आवश्यकता नहीं है. सिब्बल ने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार खुद जांच ट्रांसफर कर सकती है, तो इसके लिए शीर्ष अदालत के आदेश की क्या जरूरत है.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही राज्य में सरकार बदल गई हो, लेकिन जांच एजेंसी (ईडी) तो वही है और ईडी कोई सरकार नहीं चलाती है. अदालत अब दोनों पक्षों के तर्कों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद अपना अंतिम आदेश सुनाएगी.
क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद कोलकाता स्थित आई-पैक के दफ्तरों में ईडी की छापेमारी और तलाशी के दौरान मचे बवाल से जुड़ा है. ईडी का आरोप है कि जब एजेंसी कोयला तस्करी से जुड़े 2,742 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही थी और प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी हो रही थी, तब ममता बनर्जी और राज्य के अधिकारियों ने इसमें भारी दखल दिया. एजेंसी का यह भी दावा है कि हवाला के जरिए करीब 20 से 50 करोड़ रुपये की संदिग्ध राशि घुमाई गई है.
ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने जांच के दौरान न सिर्फ बाधा डाली, बल्कि अहम सबूतों को भी नष्ट करने की कोशिश की. बहरहाल, अदालत के इस सुरक्षित रखे गए फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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