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दुनिया का भविष्य बताने वाले ज्योतिषाचार्य नहीं पढ़ पाये बीबी की कुंडली, MLC चुनाव में मिले मुट्ठी भर वोट

UP MLC Election: चुनावी नतीजों से निराश स्मिता मिश्रा ने धांधली और बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उनके सामने ही एजेंट को डांटकर बूथ से बाहर कर दिया गया. उन्होंने दावा किया कि चुनाव के लिए उन्होंने खूब तैयारी की थी और कॉलेजों में जाकर छात्रों व शिक्षकों से संपर्क किया था.

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भविष्य बताने वाले बाबा की बीबी का चुनाव में हुआ बुरा हाल

UP MLC Election: दूसरों की किस्मत का कच्चा-चिट्ठा खोलने वाले ज्योतिषाचार्य अपनी ही पत्नी की चुनावी कुंडली नहीं पढ़ पाए. पूरी दुनिया का भविष्य बताने का दावा करने वाले आचार्य इंदु प्रकाश मिश्रा के घर में ही चुनावी सितारे गर्दिश में नजर आए. यूपी विधान परिषद चुनाव में पत्नी स्मिता मिश्रा मैदान में उतरीं, लेकिन नतीजे आए तो वोटों का ऐसा सूखा पड़ा कि 300 का आंकड़ा भी पार नहीं हुआ. अब सोशल मीडिया पर लोग ज्योतिषाचार्य का मजाक उड़ा रहे हैं.

चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद स्मिता मिश्रा चुनावी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिये. उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान में घपलेबाजी हुई है, जिसकी वजह से वो चुनावी वैतरणी पार नहीं कर पाईं.

बता दें कि लखनऊ स्नातक सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प था. समाजवादी पार्टी की कांति सिंह ने बीजेपी के अवनीश सिंह पटेल को हराकर बड़ा झटका दिया. इसी सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर स्मिता मिश्रा भी मैदान में थीं.

300 वोट भी नहीं मिले तो…

चुनावी नतीजों से निराश स्मिता मिश्रा ने धांधली और बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उनके सामने ही एजेंट को डांटकर बूथ से बाहर कर दिया गया. उन्होंने दावा किया कि चुनाव के लिए उन्होंने खूब तैयारी की थी और कॉलेजों में जाकर छात्रों व शिक्षकों से संपर्क किया था.

स्मिता के मुताबिक, उनके समर्थकों ने ऑनलाइन करीब 22 हजार फॉर्म जमा किए थे, लेकिन वोटर लिस्ट में नाम जुड़ने को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं मिला. उन्होंने चुनाव आयोग से 100 से ज्यादा शिकायतें करने का भी दावा किया और कहा कि किसी का जवाब नहीं आया.

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके समर्थकों को वोट डालने से रोका गया और वोट के बदले नोट भी बांटे गए. एसडीएम ने कहा कि बूथ के अंदर एजेंट का बैठना अलाउड नहीं है. हालांकि स्मिता मिश्रा के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया

स्मिता मिश्रा की चुनावी कहानी में कांग्रेस का अध्याय भी है. वह 28 सितंबर को कांग्रेस में शामिल हुई थीं. उस समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने उन्हें लखनऊ स्नातक सीट से उम्मीदवार बनाने का भरोसा दिया था. लेकिन कुछ ही दिन बाद अजय राय पद से हट गए और नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने उन्हें टिकट नहीं देने का फैसला किया.

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इसके बाद स्मिता निर्दलीय उम्मीदवार बनकर मैदान में उतर गईं. उम्मीद थी कि जनता का समर्थन मिलेगा, लेकिन नतीजों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया.

-भारत एक्सप्रेस



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