West Bengal Textbook Updates: पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबों और पाठ्यक्रम में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. राज्य सरकार की ओर से गठित पाठ्यक्रम समीक्षा समिति ने बांग्ला भाषा, इतिहास और अन्य विषयों में कई अहम संशोधनों की सिफारिश की है.
पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबों और पाठ्यक्रम में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. राज्य सरकार की ओर से गठित पाठ्यक्रम समीक्षा समिति ने बांग्ला भाषा, इतिहास और अन्य विषयों में कई अहम संशोधनों की सिफारिश की है.
भाषा और शब्दों में होगा बदलाव
कल्याणी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी के नेतृत्व वाली पाठ्यक्रम समीक्षा समिति ने बांग्ला भाषा की किताबों से रोजमर्रा के इस्तेमाल में न आने वाले शब्दों को हटाने की सिफारिश की है. इसके तहत ‘पानी’, ‘अब्बा’ और ‘अम्मी’ की जगह ‘जल’, ‘बाबा’ और ‘मां’ जैसे पारंपरिक बांग्ला शब्दों का इस्तेमाल किया जाएगा. समिति का लक्ष्य जनवरी 2027 तक नई पाठ्यपुस्तकों का पहला संस्करण प्रकाशित करना है.
इतिहास के पाठ्यक्रम में नए पुरातात्विक तथ्य
इतिहास की किताबों में उत्तर प्रदेश के सिनौली और हरियाणा के राखीगढ़ी में हुई नवीनतम पुरातात्विक खोजों को शामिल किया जाएगा. इन खोजों के जरिए आर्यों के आगमन और उनकी सभ्यता से जुड़े पुराने सिद्धांतों को नए तथ्यों के साथ पढ़ाया जाएगा. इसके अलावा, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन को पाठ्यक्रम में जगह मिलेगी, जबकि मुगल शासन, ब्रिटिश शासन और मार्क्सवाद से जुड़े कुछ हिस्सों को कम किया जाएगा.
ममता सरकार के समय जुड़े पाठ हटेंगे
समीक्षा समिति ने पिछली ममता बनर्जी सरकार के दौरान जोड़े गए सिंगूर भूमि अधिग्रहण आंदोलन और ‘कन्याश्री’ योजना से संबंधित अध्यायों को किताबों से हटाने का प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही साहित्य में रवींद्रनाथ टैगोर की कविता ‘शिवाजी उत्सव’ को शामिल किया जाएगा, जबकि सिराजुद्दौला पर आधारित नाटक और टैगोर की कविता ‘अफ्रीका’ को बाहर करने का फैसला लिया गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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