प्रयागराज में सजा सिनेमा का मंच,
प्रयागराज में शनिवार को सिनेमा, संस्कृति और रचनात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिला. मधुबाला फिल्म्स और रोटरी प्रयागराज संगम के संयुक्त सहयोग से अशोक नगर स्थित होटल प्रयाग इन में ‘इंटरनेशनल प्रयागराज फिल्म फेस्टिवल (IPFF) 2026’ का भव्य आयोजन किया गया. इस बार फेस्टिवल का केंद्र अवधी, भोजपुरी, बुंदेली और ब्रज भाषा में बनने वाले सिनेमा को बनाया गया, जहां क्षेत्रीय फिल्मों की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई.
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक शैली में की गई. मुख्य और विशिष्ट अतिथियों के साथ मधुबाला फिल्म्स के चेयरमैन आलोक मालवीय तथा आयोजन अध्यक्ष डॉ. अमित त्रिपाठी ने दीप जलाकर समारोह का शुभारंभ किया. सरस्वती वंदना के बाद डॉ. अमित त्रिपाठी ने स्वागत संबोधन देकर सभी अतिथियों का अभिनंदन किया. कार्यक्रम में शामिल मेहमानों का पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र देकर सम्मान किया गया.
कई दिग्गजों की रही मौजूदगी
इस आयोजन में हिंदी फिल्म जगत और मीडिया क्षेत्र की कई नामी हस्तियां शामिल हुईं. प्रसिद्ध फिल्म लेखक और पटकथा लेखक संजय मासूम मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे. वहीं चर्चित फिल्म समीक्षक और पत्रकार दीपक दुआ तथा रोटरी डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रोटेरियन पूनम गुलाटी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं. पूनम गुलाटी ने अपने संबोधन में कला और सृजन के क्षेत्र में युवाओं को आगे बढ़ने का संदेश दिया और उन्हें प्रोत्साहित किया.
रचनात्मक प्रतिभाओं का हुआ सम्मान
फेस्टिवल के दौरान ‘रोटरी क्रिएटिव लीडरशिप अवार्ड्स’ भी प्रदान किए गए. कला, संस्कृति और रचनात्मक नेतृत्व से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को इस मंच पर सम्मानित किया गया. सम्मान समारोह ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बना दिया.
क्षेत्रीय सिनेमा पर हुई गंभीर चर्चा
दोपहर के सत्र में अवधी, भोजपुरी, बुंदेली और ब्रज भाषा के सिनेमा को लेकर विशेष परिचर्चा आयोजित की गई. वक्ताओं ने क्षेत्रीय फिल्मों को भारतीय संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया और कहा कि स्थानीय भाषाओं में बनने वाला सिनेमा अपनी मिट्टी और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है.
वक्ताओं ने रखे अपने विचार
परिचर्चा में डॉ. रंजीत सिंह ने आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा कि क्षेत्रीय बोलियों को सिनेमा के माध्यम से सुरक्षित रखना समय की जरूरत है. वहीं वीरेंद्र मिश्र ने फिल्मों की तकनीकी गुणवत्ता पर जोर देते हुए कहा कि सिनेमा समाज का प्रतिबिंब होता है, इसलिए उसमें सच्चाई और प्रामाणिकता दिखाई देनी चाहिए. डॉ. मृणाल कांत पांडेय ने कहा कि स्थानीय भाषाओं की फिल्मों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में ऐसे आयोजन बेहद उपयोगी साबित होंगे.
फिल्म देखने की समझ पर हुई चर्चा
भोजनावकाश के बाद ‘फिल्में कैसे देखें’ विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई. फिल्म समीक्षक दीपक दुआ ने कहा कि एक सामान्य दर्शक और समीक्षक की नजर में अंतर होता है. उन्होंने बताया कि फिल्म को समझने के लिए कहानी के साथ-साथ कैमरा वर्क, लाइटिंग, बैकग्राउंड स्कोर और तकनीकी पक्षों पर भी ध्यान देना चाहिए.
इसी सत्र में राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि फिल्म का हर दृश्य अपने भीतर एक अलग अर्थ और संदेश रखता है. दर्शकों को सिनेमा की इस भाषा को पढ़ना और समझना सीखना चाहिए.
स्क्रीनप्ले की ताकत पर विशेषज्ञों की राय
शाम 4:30 बजे ‘फिल्म में स्क्रीनप्ले’ विषय पर दूसरा महत्वपूर्ण पैनल डिस्कशन हुआ. संजय मासूम ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि प्रयागराज वह शहर है जिसने उन्हें पहचान दिलाई और ऐसे आयोजन यहां लगातार होते रहने चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी भी फिल्म की असली ताकत उसकी पटकथा होती है. यदि किरदार मजबूत नहीं होंगे और उनकी भावनाएं प्रभावी नहीं होंगी तो बड़े सितारे भी फिल्म को सफल नहीं बना सकते.
धनंजय चोपड़ा ने कहा कि एक अच्छा स्क्रीनप्ले वही है जो दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रखे. वहीं रतिभान त्रिपाठी ने कहा कि संवादों में स्थानीय संस्कृति और भाषा की झलक होनी चाहिए, तभी कहानी दर्शकों के दिल तक पहुंचती है.
सांस्कृतिक कार्यक्रम ने बांधा समां
फेस्टिवल के समापन चरण में उदय चंद परदेसी और उनकी टीम ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं. रंगारंग कार्यक्रम ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. पूरे माहौल में कला और संस्कृति का उत्सव देखने को मिला.
सफल आयोजन के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का समापन सम्मान समारोह और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ. इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में मधुबाला फिल्म्स के चेयरमैन आलोक मालवीय और इंटरनेशनल प्रयागराज फिल्म फेस्टिवल 2026 के कार्यक्रम अध्यक्ष तथा रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3120 के डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी डॉ. अमित त्रिपाठी की महत्वपूर्ण भूमिका रही. फेस्टिवल ने एक बार फिर साबित किया कि क्षेत्रीय भाषाओं और संस्कृति को सिनेमा के माध्यम से नई पहचान देने के लिए ऐसे मंच बेहद जरूरी हैं.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



