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अंतरराष्ट्रीय प्रयागराज फिल्म फेस्टिवल 2026 का भव्य शुभारंभ, फिल्म संस्कृति और साहित्य के संगम का साक्षी बना प्रयाग; प्रदर्शनी में छाई ‘कवन कसूर’

प्रयागराज में अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ. इस दौरान भारत एक्सप्रेस, बनारस टॉकीज और जयंत मीडिया द्वारा निर्मित सामाजिक भोजपुरी फिल्म ‘कवन कसूर’ का विशेष प्रदर्शन किया गया, जिसे दर्शकों की भरपूर सराहना मिली.

International Prayagraj Film Festival 2026
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

विशाल तलवार


International Prayagraj Film Festival 2026: धर्म, अध्यात्म और ज्ञान की पावन संगम नगरी प्रयागराज शुक्रवार को विश्वस्तरीय सिनेमा, समृद्ध लोक संस्कृति और गंभीर साहित्यिक विमर्श के अद्भुत संगम की साक्षी बनी. मधुबाला फिल्म्स के तत्वावधान एवं रोटरी प्रयागराज संगम के विशेष सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय ‘अंतरराष्ट्रीय प्रयागराज फिल्म फेस्टिवल 2026’ का भव्य शुभारंभ शुक्रवार को अशोक नगर स्थित होटल प्रयाग इन में गरिमामयी वातावरण के बीच संपन्न हुआ.

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधीर नारायण अग्रवाल उपस्थित रहे. कार्यक्रम की अध्यक्षता गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज के निदेशक प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने की. वहीं विशिष्ट अतिथि के तौर पर यूनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के प्रबंध निदेशक (एमडी) डॉ. सतपाल गुलाटी तथा प्रयागराज के अपर आयुक्त डॉ. शमशेर जमदग्नि मंचासीन रहे.

दीप प्रज्ज्वलन, राष्ट्रगान और अतिथियों के अभिनंदन के साथ शुरू हुए इस समारोह में वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि सिनेमा मात्र मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह समाज, संस्कृति, संवेदना, साहित्य और मानवीय विचारों को अभिव्यक्ति देने का एक अत्यंत सशक्त माध्यम है. ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से न केवल क्षेत्रीय व नई प्रतिभाओं को अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिलता है, बल्कि भारतीय संस्कृति और मौलिक रचनात्मकता को वैश्विक मंचों पर नई पहचान भी प्राप्त होती है.

प्रयागराज की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया विस्तार

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सुधीर नारायण अग्रवाल ने कहा कि प्रयागराज जैसी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक चेतना की उर्वरा भूमि पर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन अत्यंत गौरवशाली और अभिनंदनीय पहल है. ऐसे आयोजन समाज, कला और वैचारिक संवाद के सेतु को सुदृढ़ करते हैं.

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने रेखांकित किया कि सिनेमा समाज का यथार्थवादी दर्पण होने के साथ-साथ युगांतरकारी सामाजिक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम है. उन्होंने कहा कि यह फेस्टिवल नई पीढ़ी को साहित्य और कला की समृद्ध जड़ों से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा.

विशिष्ट अतिथि डॉ. सतपाल गुलाटी ने मधुबाला फिल्म्स के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह मंच रचनात्मक प्रतिभाओं और फिल्म उद्योग के जानकारों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहा है. उन्होंने भविष्य में भी इस मंच को पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया. वहीं अपर आयुक्त डॉ. शमशेर जमदग्नि ने कहा कि प्रयागराज की पहचान साहित्य और संस्कृति के गढ़ के रूप में रही है, और यह अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल इस वैश्विक पहचान में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ रहा है.

इस अवसर पर अतिथियों ने सीमित संसाधनों के बीच कला और सिनेमा को समर्पित इतना भव्य मंच तैयार करने के लिए मधुबाला फिल्म्स के अध्यक्ष आलोक मालवीय, आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. अमित त्रिपाठी एवं सहयोगी संतोष तिवारी को विशेष रूप से साधुवाद दिया और निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया.

दूसरे सत्र में छाई बहुचर्चित भोजपुरी फिल्म ‘कवन कसूर’

फिल्म फेस्टिवल के द्वितीय सत्र का मुख्य आकर्षण सामाजिक सरोकारों पर आधारित बहुचर्चित भोजपुरी फिल्म ‘कवन कसूर’ (Kavan Kasoor) का विशेष प्रदर्शन रहा. यह फिल्म भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क, बनारस टॉकीज और जयंत मीडिया के संयुक्त बैनर तले निर्मित की गई है, जिसका कुशल निर्देशन भारत एक्सप्रेस के डायरेक्टर, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक राधेश्याम राय ने किया है.

फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में अभिनेता राज सिंह, अभिनेत्री गुंजन पंत, सोनालिका, सुशील सिंह और ललितेश झा जैसे मंझे हुए कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.

सभागार में उपस्थित प्रबुद्ध दर्शकों, समीक्षकों और फिल्म प्रेमियों ने फिल्म के मार्मिक सामाजिक संदेश, संवेदनशील विषयवस्तु और बेहतरीन तकनीकी गुणवत्ता की मुक्तकंठ से प्रशंसा की. विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि ‘कवन कसूर’ केवल एक फीचर फिल्म नहीं है, बल्कि यह भोजपुरी सिनेमा की पारंपरिक लीक से हटकर एक सकारात्मक, स्वस्थ और दीर्घकालिक बदलाव की क्रांतिकारी शुरुआत है. पारिवारिक मर्यादा, साफ-सुथरे कथानक और बेहतरीन संगीत के दम पर यह फिल्म भोजपुरी सिनेमा पर चस्पा होने वाली फूहड़ता और अश्लीलता की भ्रामक धारणा को ध्वस्त करने की पूरी क्षमता रखती है.

कविता, सिनेमा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और लोकगीतों की गूंज

फिल्म स्क्रीनिंग के उपरांत तृतीय सत्र में ‘फिल्म एवं कविता विमर्श’ पर गंभीर वैचारिक सत्र आयोजित किया गया. इस सत्र में ख्यातिलब्ध कवि एवं साहित्यकार डॉ. श्लेष गौतम, मुरादाबाद से पधारे राहुल शर्मा, प्रो. रंजीत सिंह एवं विदुषी नीलम तिवारी ने सिनेमाई गीतों और समकालीन कविता के अंतर्संबंधों पर अपने सारगर्भित विचार रखे.

चतुर्थ सत्र में आधुनिक तकनीकी युग की मांग को देखते हुए ‘सिनेमा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (AI in Film) विषय पर केंद्रित परिचर्चा हुई. इसमें SMEDO प्रयागराज के निदेशक फरहान फारूखी, एनिमेटर ठाकुर शिव सागर सिंह तथा एआई एक्सपर्ट रत्नेश कुमार दीक्षित ने विस्तार से बताया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फिल्म निर्माण, एनिमेशन, वीएफएक्स और पटकथा लेखन को नया आयाम दे रही है.

प्रथम दिवस का समापन प्रयागराज की सुप्रसिद्ध लोक गायिका स्वाति निरखी एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत मनमोहक सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ. कलाकारों ने फिल्मों में लोकगीतों की आत्मा और उनकी मिठास को अपनी सुरीली प्रस्तुतियों से जीवंत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया.

तीन दिवसीय महोत्सव: आगे क्या रहेगा खास?

आयोजकों ने बताया कि यह तीन दिवसीय फिल्मोत्सव आगामी दो दिनों तक कला और विमर्श के विभिन्न रंगों से सजेगा:

31 अक्टूबर 2026 (द्वितीय दिवस): होटल प्रयाग इन में सुबह 11:00 बजे से विभिन्न सत्रों में देश-विदेश की चुनिंदा फिल्मों की स्क्रीनिंग, फिल्म निर्माण की बारीकियों पर कार्यशालाएं और शाम को सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी.

1 नवंबर 2026 (समापन दिवस): महोत्सव का भव्य समापन समारोह मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT सभागार, प्रयागराज) में आयोजित किया जाएगा.

इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन का मूल ध्येय प्रयागराज की सांस्कृतिक गरिमा को विश्व पटल पर स्थापित करना, उभरते हुए युवा फिल्मकारों को सशक्त मंच देना और सिनेमा को समाज के रचनात्मक संवाद का माध्यम बनाना है.

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