Mirzapur Politics: मिर्जापुर वेबसीरीज ने तो भारी धमाल मचाया था, लेकिन अब सियासत में भी एक मिर्जापुर सीरीज चल पड़ी है. मिर्जापुर की गद्दी के कई दावेदार सामने आने लगे हैं और सब दे रहे हैं चुनौती केंद्रीय मंत्री और अपना दल (एस) की नेता अनुप्रिया पटेल को.
दिव्या मित्तल का सियासी शंखनाद
अनुप्रिया पटेल को पहली चुनौती तो दी मिर्जापुर की कलेक्टर के रूप में बड़ा नाम कमा चुकी दिव्या मित्तल ने. जिन्होंने आईएएस की नौकरी छोड़ी और फिर ‘जननीति भारत’ पार्टी बनाने का ही ऐलान कर दिया. मिर्जापुर की गद्दी की दावेदार दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर सदर सीट से लड़ने का ऐलान भी कर दिया है, लेकिन उनका दावा यहीं तक सीमित नहीं रहा.

असली नजर मिर्जापुर पर (UP Vidhan Sabha Chunav Mirzapur seat)
दिव्या मैडम ने तो अब ऐलान कर दिया है कि उनकी पार्टी यूपी की सारी 403 सीटों पर लड़ेगी और जीतकर अपनी सरकार भी बनाएगी. पहले तो लगा कि दिव्या मित्तल तमाम ब्यूरोक्रेट की तरह सियासत करेंगी और हार कर घर बैठ जाएंगी. लेकिन मैडम के तेवर ऐसे हैं कि योगी आदित्यनाथ को न सही, पर अनुप्रिया पटेल को तो खतरा हो ही सकता है. भले ही 403 सीटों पर दिव्या मित्तल की पार्टी जननीति भारत चुनाव लड़े, लेकिन असली जोर तो उनका मिर्जापुर और आसपास के इलाकों में ही रहना है. यानी जंग मिर्जापुर की गद्दी की ही है.

चुनार से जातीय समीकरण पर दांव
तैयारी भी पूरी है दिव्या मैडम की, वो जनसंवाद करने भी निकल पड़ी हैं. जाति समीकरण का भी ध्यान रखते हुए दिव्या मित्तल महाराज गुहराज निषाद की भी जय-जयकार कर रही हैं. उन्होंने ऐलान कर दिया है कि चुनार से भी उनकी पार्टी लड़ेगी. अनुप्रिया पटेल को खतरा इसलिए हो सकता है कि मिर्जापुर की कलेक्टर रहते दिव्या मित्तल का अनुप्रिया पटेल से खासा बैर था.
अपना दल (एस) में बगावत (Anupriya Patel Apna Dal S Mirzapur)
खैर, अनुप्रिया पटेल दिव्या मित्तल से निपटने का प्लान बना ही रही थीं कि एक और प्रॉब्लम उनके सामने आ गई. उनकी अपनी ही पार्टी में सेंध लग गई. अब छोटी-सी तो पार्टी है, 2022 में बीजेपी ने कुल 17 सीटें लड़ने को दी थीं, जिसमें से 12 जीत भी ली थीं.

लेकिन अब अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल (एस) की ही विधायक रिंकी कोल के ससुर और रॉबर्ट्सगंज के पूर्व सांसद पकौड़ी लाल कोल ने बगावत कर दी है. वैसे बगावत तो वो पहले ही कर चुके थे, लेकिन अब उन्होंने अलग पार्टी बना ली है जिसका नाम रखा है विंध्य समता समाज पार्टी यानी वीएसएसपी (VSSP).
टिकट कटने की टीस और पुरानी अदावत
पकौड़ी लाल कोल 2019 में अपना दल (एस) के टिकट पर सांसद चुने गए थे. लेकिन 2024 में अनुप्रिया पटेल ने उनकी जगह उनकी ही बहू रिंकी कोल को रॉबर्ट्सगंज लोकसभा सीट से टिकट दे दिया था, जो छानबे सीट से विधायक भी थीं. खैर, रिंकी कोल लोकसभा चुनाव हार गई थीं, लेकिन पकौड़ी लाल कोल तो तभी से अनुप्रिया पटेल से भड़के हुए थे. अब पकौड़ी लाल कोल भी कोई अपना दल (एस) के भरोसे तो थे नहीं, 2009 में वो समाजवादी पार्टी के टिकट पर भी सांसद चुने गए थे.

एक गद्दी और तीन तगड़े दावेदार
तो साहब, पकौड़ी लाल कोल अब हो गए हैं विंध्य समता समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, और उनकी निगाह भी अब मिर्जापुर की गद्दी पर है. यानी वो भी अनुप्रिया पटेल को ही चुनौती देंगे. तो अब मिर्जापुर की गद्दी के तीन दावेदार हो गए. एक अनुप्रिया पटेल हैं ही जो एनडीए के साथ हैं, दूसरी हुईं पूर्व आईएएस और जननीति भारत की अध्यक्ष दिव्या मित्तल, और तीसरे हुए विंध्य समता समाज पार्टी के अध्यक्ष पकौड़ी लाल कोल. तीनों दावेदारों के बीच होगी मिर्जापुर की जंग. अब आगे क्या क्या होगा. जल्द ही पता चल जाएगा.
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