उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीलीभीत जिले में ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ की पुण्य स्मृति में आयोजित भव्य श्रीराम कथा महोत्सव को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में 1990 की ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र करने के साथ-साथ अयोध्या के भव्य कायाकल्प और केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों पर खुलकर विचार रखे.
संतुष्टिकरण से आया रामराज्य
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कड़े शब्दों में कहा कि पिछली सरकारों की तुष्टिकरण की राजनीति ने देश में आतंकवाद और नक्सलवाद को बढ़ावा दिया, जबकि मौजूदा सरकार ने ‘संतुष्टिकरण’ के माध्यम से रामराज्य का मार्ग प्रशस्त किया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना किसी भेदभाव के समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही रामराज्य की वास्तविक अवधारणा है.
अयोध्या के संघर्ष और बदलाव का किया जिक्र
दो नवंबर 1990 की घटना का स्मरण करते हुए सीएम योगी ने कहा कि एक वह दौर था जब अयोध्या में रामभक्तों पर गोलियां चलाई जाती थीं और ‘जय श्रीराम’ बोलने तक पर प्रतिबंध था. लेकिन 500 वर्षों के लंबे और कठिन संघर्ष के बाद आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है और देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर रहे हैं.
उन्होंने बताया कि पहले जहां अयोध्या में संकरी गलियां, गंदगी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, वहीं आज चार लेन की चौड़ी सड़कें, आधुनिक रेल सुविधाएं और महर्षि वाल्मीकि के नाम पर बना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शहर की तस्वीर बदल चुका है. वर्तमान में रोजाना एक लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि आस्था के केंद्र किस तरह विकास के नए सोपान तय कर रहे हैं.
धार्मिक स्थलों का विकास
भारत की विविधता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक भले ही भाषा और वेशभूषा अलग हो, लेकिन हमारी साझा आस्था और संस्कृति पूरे देश को एक सूत्र में बांधती है. उन्होंने कहा कि अयोध्या के साथ-साथ काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन, मां विंध्यवासिनी धाम और लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ में कॉरिडोर के निर्माण से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बड़ा बढ़ावा मिला है.
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कार्यक्रम के अंत में सीएम योगी ने ब्रह्मलीन महंत योगी शांतिनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित की और मंदिर परिसर की स्वच्छता व आध्यात्मिक वातावरण की सराहना करते हुए सभी से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया.
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